एटा। मुकदमा दर्ज होने के 23 साल बाद सेवानिवृत्त संग्रह अमीन हरी सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में अर्जी लगाई। सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद ने इस अर्जी को खारिज कर दिया। आरोप है कि हरि सिंह ने नाैकरी से निलबंन के बाद भी सरकारी अभिलेख वापस जमा नहीं किए। सरकारी दस्तावेज अपने पास रखे और काफी बकायेदारों से धन लिया लेकिन रसीदें नहीं दीं थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक नगला माेती कुदर थाना ढोलना, कासगंज निवासी हरी सिंह संग्रह अमीन पद पर जलेसर तहसील में कार्यरत थे। हरि सिंह को लापरवाही बरतने, दाखिला दिवसों पर दाखिला न करने और बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने के कारण 24 दिसंबर 2001 को निलंबित किया गया था। 14 फरवरी 2002 को आदेश जारी हो गया था। तत्कालीन एसडीएम जलेसर ने 3 अप्रैल 2002 को आपराधिक न्यास भंग के तहत हरी सिंह के खिलाफ थाना जलेसर में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना कर न्यायालय में आरोपपत्र भेजा। अदालत से वारंट जारी होने के बाद भी आरोपी हाजिर नहीं हुआ। इसके बाद अदालत के आदेश पर कुर्की की गई। अदालत में अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र पेश कर हरी सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी ने उस समय इस प्रकरण की जांच एडीएम से कराई थी। जांच में पाया गया कि लगाए गए आरोप गलत हैं। कहा कि उन्हें एफआईआर के बारे में उसे जानकारी ही नहीं दी गई थी।