एटा। निराश्रित गोवंशों को गोशालाओं में पहुुुुंचाने के लिए पहले 31 मार्च, फिर 5 अप्रैल की तारीख तय की गई। तारीख पर तारीख मिल रही है, लेकिन निराश्रित गोवंशों से लोगों को मुक्ति नहीं मिल पा रही है। आज भी तमाम निराश्रित गोवंश खुले में भटक रहे हैं।जिले में निराश्रित गोवंशों को संरक्षित करने के लिए 28 गोशालाएं संचालित की गईं हैं। यहां पर पांच हजार के करीब गोवंश पहुंचाए गए हैं। जबकि 1500 के करीब गोवंश सुपुर्दगी में दिए गए हैं। वर्तमान में खुले में घूम रहे गोवंशों की संख्या भी पशुधन विभाग एक हजार के करीब बता रहा है। शहर के आसपास से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंश सड़कों और खेतों में देखने को मिल रहे हैं। कस्बाई क्षेत्रों में भी काफी संख्या में गोवंश भटकते नजर आ रहे हैं।
बता दें कि निराश्रित गोवंशों को गोशालाओं में पहुंचाने की मुख्यमंत्री स्तर से 31 मार्च तक की तिथि घोषित की गई, लेकिन कुछ नहीं हो सका। इसके बाद पांच अप्रैल तक सभी निराश्रित गोवंशों को गोशालाओं में भेजने का समय दिया गया, लेकिन बुधवार को भी जिले में जगह-जगह निराश्रित गोवंश घूमते पाए गए।
दृश्य 1: शहर में ठंडी सड़क काफी व्यस्त मार्ग है। दोपहर करीब 1 बजे यहां एकदम से आठ-दस गोवंशों का झुंड आ गया। सड़क पर अचानक आए इतने गोवंशों को देख राहगीर परेशान हो गए। यातायात भी अव्यवस्थित हुआ। यहां से बढ़कर यह झुंड जीटी रोड पर चला गया।
दृश्य 2: सकीट कस्बे में दोपहर 12 बजे मेन मार्केट में कहीं से अचानक 12 से अधिक गोवंश आ पहुंचे। मेन मार्केट होने की वजह से यहां हर समय भीड़भाड़ रहती है। गोवंशों को देखकर लोगों को असुविधा हुई। तमाम लोग इनसे बचने के लिए एक ओर खड़े हो गए।
दृश्य 3: मिरहची में एटा-कासगंज हाईवे पर दोपहर 1:30 बजे गोवंशों का झुंड घूम रहा था। हाईवे होने की वजह से यहां हर समय तेज रफ्तार वाहनों का आवागमन रहता है, लेकिन गोवंशों के विचरने की वजह से चालकों को वाहन काफी सावधानी से चलाने पड़ रहे थे।
दृश्य 4: निधौली कलां क्षेत्र के गांव सलमपुर में कई सांड़ और गाय का झुंड खेतों में फसल चर रहे थे। जिन्हें वहां से भगाया गया तो एक मैदान में जाकर एकत्रित हो गए। किसानों ने बताया कि कई गोवंश गांव में स्थायी रूप से बने हुए हैं, जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।