एटा। अलीगंज पालिकाध्यक्ष की कुर्सी साल 2007 के बाद से किसी एक पार्टी की होकर नहीं रही। यहां हर चुनाव में अध्यक्ष पद दूसरी पार्टी का बनता रहा है।
साल 1971 में नगर पालिका परिषद अलीगंज अस्तित्व में आई। इसके बाद निर्दलीय प्रत्याशियों का पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा रहा।
साल 1974 से 14 साल के लिए उपजिलाधिकारी पर यह प्रभार रहा। इसके बाद 1988 में निर्दलीय प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार गुप्ता ने पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर राज किया। पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद एक साल तक फिर से प्रशासन का अधिकार रहा। इसके बाद 1995 में चुनाव हुआ। जिसमें समाजवादी पार्टी ने परचम लहराया। सपा के मसूद अली खां नगर पालिका परिषद अलीगंज के अध्यक्ष चुने गए। साल 2000 में समाजवादी पार्टी की रहीस जहां बेगम ने पालिकाध्यक्ष की शपथ ली। 2006 में सपा के मसूद अली खां ने पालिकाध्यक्ष की शपथ ली।
लेकिन एक साल बाद ही उनका निधन हो गया। जिसके बाद फिर से चुनाव प्रक्रिया हुई। जिसमें भाजपा के प्रदीप कुमार गुप्ता ने विजय हासिल की। 2012 में फिर से समाजवादी पार्टी के वकील शाह ने पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा किया। जबकि 2017 में भाजपा के बृजेश कुमार गुप्ता पालिकाध्यक्ष हो गए।
अलीगंज की जनता ने हर पार्टी के नेता को पालिकाध्यक्ष चुना। लेकिन जनप्रतिनिधियों के रवैये के चलते हर पांच साल बाद लोग दूसरे जनप्रतिनिधि को चुनते रहे। - सूर्यकांत गुप्ता, अलीगंज
अलीगंज पालिकाध्यक्ष के रूप में लगातार समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने दो बार शपथ ली है। उसके बाद हर बार किसी नए जनप्रतिनिधि को ही चुना। - जितेंद्र नाथ सक्सेना, अलीगंज
पालिकाध्यक्ष- कार्यकाल- पार्टी
सुरेंद्र कुमार गुप्ता- 1988-1993- निर्दलीय
मसूद अली खां- 1995-2000- सपा
रहीस जहां बेगम- 2000-2005- सपा
मसूद अली खां- 2006-2007 (निधन)- सपा
प्रदीप कुमार गुप्ता- 2008-2012- भाजपा
बकील शाह- 2012-2017- सपा
बृजेश कुमार गुप्ता उर्फ राजू- 2017-2022- भाजपा
कई पदों के उम्मीदवारों के प्रस्तावक बन सकेंगे मतदाता
एटा। निकाय चुनाव में उम्मीदवारों के प्रस्तावकों को लेकर चुनाव आयोग ने गाइडलाइन जारी की है। जिसके तहत मतदाता कई पदों के उम्मीदवारों के प्रस्तावक बन सकेंगे।
एक ओर जहां उच्च न्यायालय में दायर याचिका के चलते चुनाव अधिसूचना जारी किए जाने पर रोक लगी हुई है। जिससे संभावित उम्मीदवार उलझन में हैं। वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग की तैयारियों में कमी नहीं है। लगातार दिशा-निर्देेश जारी किए जा रहे हैं। प्रस्तावक बनाए जाने को लेकर भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिसके मुताबिक अलग-अलग पदों के लिए मतदाता कितने भी प्रत्याशियों का प्रस्तावक बन सकता है। यही नहीं, खुद उम्मीदवार भी अन्य पद के उम्मीदवारों का प्रस्तावक बन सकता है। अलग-अलग पद के उम्मीदवार एक-दूसरे के प्रस्तावक बन सकेंगे। लेकिन एक प्रतिबंध भी लगाया गया है। जिसके तहत समान पद के उम्मीदवार एक-दूसरे के प्रस्तावक नहीं बन सकेंगे। उप जिला निर्वाचन अधिकारी एडीएम वित्त एवं राजस्व आयुष चौधरी ने बताया कि नामांकन से संबंधित चुनाव आयोग से जो भी गाइडलाइन आ रही हैं, वो संभावित उम्मीदवारों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिससे कि वह गाइडलाइन के मुताबिक नामांकन प्रस्तुत करें और किसी तरह की असुविधा या आपत्ति की स्थिति न बने।