एटा। मंगलवार को सिकंदराराऊ में हादसा हुआ तो आसपास के क्षेत्र में हाहाकार मच गया। लोग लाशों के ढेर में अपनों को तलाश रहे थे। कुछ ऐसा भी देखने को मिला जिसकी लोगों को उम्मीद भी नहीं थी। एक व्यक्ति एटा से सत्संग में शामिल होने गया था। उसे जानकारी नहीं थी वहां दिल्ली से उसकी पत्नी भी पहुंची है। भगदड़ के दौरान वह लाशों के ढेर में दबती जा रही थी। तभी उसने अपने पति को देखा और बेटे का नाम लेकर आवाज लगाई। इस पर पति ने शवों के बीच से उसे निकाला। इस कदर डरे हुए थे कि अस्पताल भी नहीं गए, घायल अवस्था में सीधे घर पहुंचे। मन का डर निकलने के बाद बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए, जहां दोनों का उपचार चल रहा है।
थाना कोतवाली नगर के शिवसिंहपुर निवासी मौजीराम ने बताया कि उनकी पत्नी जयप्रभा अपने मायके दिल्ली गई हुई थी। ससुर की मौत हो जाने के बाद सोमवार को वहां तेरहवीं का कार्यक्रम था। मंगलवार को सिकंदराराऊ में भोले बाबा का सत्संग था। उसमें शामिल होने के लिए मैं वहां पहुंचा था। कार्यक्रम समाप्त होते ही भगदड़ मच गई और बहुत सी महिलाएं व बच्चे लोगों के पैरों तले कुचलकर मौत का शिकार हो गए। मैं इन लोगों को बचाने के लिए लगा हुआ था। तभी लाशों के ढेर के बीच से एक आवाज आई कि आनंद के पापा मुझे बचाओ... आनंद मेरे बेटे का नाम है। मैंने चौंककर देखा।
महिला को देखकर मैं हक्का-बक्का रह गया क्योंकि वह मेरी पत्नी जयप्रभा ही थी। किसी तरह कड़ी मशक्कत के बाद उसको वहां से निकाला। जयप्रभा ने बताया कि वह दिल्ली से सीधी सत्संग में ही आ गई। दोनों लोग वहां से घर पहुंचे। सत्संग स्थल पर मौत का मंजर देखकर घायल होते हुए भी हिम्मत नहीं जुटा पाए कि अस्पताल जाएं। किसी तरह साहस जुटाकर बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जहां दोनों का उपचार चल रहा है।