कासगंज। किसानाें को अपनी फसलों की चिंता सता रही है। इस समय खेतों में मक्का, बाजरा, ईख, मूंगफली, सिवाला, अरबी सहित तमाम फसलें खड़ी हैं। पशुओं के लिए हरा चारा भी उगा है। बाढ़ के पानी से फसलें पूरी तरह से जलमगभन हैं। कंडे और भुस के बिटौरे बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। तटीय गांवों में चाराें ओर पानी की मटमैली सी चादर तनी दिखाई दे रही है। पाठकपुर की शारदा ने बताया कि सुबह सात बजे गांव में पानी घुस आया। भुस और कं डे के बिटौरे बर्बाद हो गए। खेतों में पानी भर गया है। पाठकपुर के ही हरपाल सिंह ने कहा कि पहले की बाढ़ से बर्बाद हुआ किसान अभी तक नहीं उबरा है और अब फिर से खेती बर्बाद हो रही है। दतलाना के हरिओम मिश्रा ने बताया कि खेतों में लबालब पानी भरा हुआ है। अब चारे की भी दिक्कत हो जाएगी। लहरा के सुरेंद्र ने बताया कि वह सुबह पांच बजे उठे तो घर के बाहर पानी देख आनन-फानन में सामान समेटा और सुरक्षित स्थान की ओर आ गए। पंखिया नगला के अजमेरी, सरताज, जाहिर ने बताया कि शुक्रवार की रात को सात बजे ही उनके गांव में पानी भर गया। रात भर लोगों ने सामान निकालकर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन किया।