एटा। लोकतंत्र के महापर्व पर मतदान करने का पांच वर्ष में एक बार मौका मिलता है। तमाम लोग ऐसे मौकों पर भी मतदान करने के लिए नहीं जाते हैं। ऐसे लोगों के लिए 85 वर्षीय बांकेलाल नजीर हैं। उम्र का तकाजा और मुंह में कैंसर का जख्म भी मतदान के लिए उनकी राह नहीं रोक सका। बूथ पर पहुंचे और मतदान कर अपनी जिम्मेदारी को निभाया।शहर के मोहल्ला गांधी मार्केट निवासी 85 वर्षीय बांकेलाल प्राइवेट नौकरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। नाती कशिश ने बताया कि बाबा को कपूरी खाने का शौक था। तीन वर्ष पहले मुंह में कुछ दिक्कत हुई तो जांच कराने पर कैंसर का पता लगा। आगरा से लेकर दिल्ली तक इलाज चला। ऑपरेशन, क्रीमोथेरेपी की गई। लेकिन इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सका। कुछ माह पहले चिकित्सकों ने इलाज में हाथ खड़े कर दिए और कैंसर की अंतिम स्टेज बताकर घर भेज दिया। बांकेलाल जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं। परिवार के सदस्य उनकी देखभाल करते हैं। बृहस्पतिवार को शहर की सरकार चुनने के लिए लोकतंत्र के महापर्व पर मतदान था। इसको लेकर वह सुबह से ही उत्साहित थे। घर से पांच सौ मीटर की दूरी पर प्रिंटिस इंटर कॉलेज में पोलिंग बूथ था। ऐसे में बांकेलाल परिजनों को बिना बताए मतदान करने के लिए घर से निकल पड़े। बमुश्किल चल पा रहे थे। रास्ते में बाइक पर नाती कशिश मिले। जो उन्हें बाइक पर बैठाकर पोलिंग बूथ लेकर आए और मतदान कराया। बताया कि बाबा को हमेशा ही मतदान का उत्साह रहा। हर चुनाव में वोट डालने जाते थे। संवाद