एटा। दिसंबर माह में एक सप्ताह से अधिक का समय व्यतीत हो गया है। सर्दी भी पड़ रही है, लेकिन जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 50 हजार विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में अभी डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) के तहत स्वेटर-यूनिफॉर्म, जूते-मोजे आदि की धनराशि नहीं पहुंची है। विद्यार्थी बिना स्वेटर व जूते-मोजे के सर्दी में ठिठुरते नजर आ रहे हैं।
जिले के 1691 परिषदीय विद्यालयों में एक लाख 43 हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। सरकार द्वारा विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में 1200 रुपये डीबीटी के माध्यम से भेजे जाते हैं। इससे विद्यार्थी के लिए बैग, यूनिफार्म, स्वेटर, जूते व मोजे खरीदने होते हैं। पहले विद्यालय स्तर से ही प्रधानाध्यापक द्वारा विद्यार्थियों को दिए जाते थे, लेकिन सवाल उठे तो इस व्यवस्था में परिवर्तन किया गया।
सरकार अभिभावकों के खाते में धनराशि भेजने लगी, लेकिन जिले में चल रहे शिक्षा सत्र में अब तक 93 हजार विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से धनराशि आई है। यह धनराशि प्रथम चरण में भेजी गई थी। जबकि 50 हजार विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में यह धनराशि नहीं आई है। जबकि 10 दिसंबर व्यतीत हो चुकी है। ऐसे में सर्दी में सुबह के समय विद्यार्थी ठिठुरते हुए विद्यालयों में पहुंच रहे हैं।
खातों में आई धनराशि नहीं खरीदा स्वेटर
विद्यालयों के प्रधानाध्यापकाें की मानें तो जिन विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में डीबीटी की धनराशि पहुंची भी है। उनमें से अधिकांश अभिभावकाें ने बच्चों के लिए स्वेटर नहीं खरीदा है। विद्यार्थी पुराना स्वेटर पहनकर ही विद्यालयों में पहुंच रहे हैं।
शासन से ही विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में धनराशि भेजी जाती है। प्रथम चरण में 93 हजार विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में धनराशि पहुंच गई है। 42 हजार विद्यार्थियों का आधार कार्ड सत्यापित कर शासन को भेजा जा चुका है। अन्य के आधार कार्ड सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। लखनऊ से ही अभिभावकों के खाते में धनराशि डाली जाएगी। - दिनेश कुमार, बीएसए