एटा। जनपद में मिलावटखोर खाने-पीने की चीजों में मिलावट करने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार कार्रवाई करते। इस वित्तीय वर्ष में 24 मिलावट खोरों पर 4.46 लाख रुपये का जुर्माना लग चुका है। इसके बाद भी मिलावट खोरी कम नहीं हो रही है। इस साल 46 में से 32 खाद्य पदार्थों के नमूने फेल हुए हैं।
खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने मिलावट खोरों पर अंकुश लगाने के लिए शहर से लेकर देहात तक एक अप्रैल से अब तक 56 खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए। इसमें अब तक 46 खाद्य पदार्थों की रिपोर्ट आई। इसमें से 32 खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता मानक के अनुसार नहीं पाई गई। कुछ खाद्य पदार्थों में केमिकल या अन्य असुरक्षित खाद्य पदार्थ पाए जाने के कारण जांच रिपोर्ट में मानव जीवन के लिए असुरक्षित घोषित किया गया। विभागीय अधिकारियों द्वारा 32 मिलावट खोरों पर मुकदमा दर्ज कराया गया। जहां 29 मुकदमे एडीएम कोर्ट में दर्ज कराए गए। जबकि 3 मुकदमे न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां दर्ज हुए।
रिपोर्ट आने में होती है देरी
मिलावटखोरों के हौसले बुलंद होने का सबसे बड़ा कारण रिपोर्ट देरी से आना है। दरअसल, खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन विभाग संदिग्ध खाद्य पदार्थों के सैंपल लेता है। सैंपल को जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला में भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने में देरी होती है। तब तक मिलावटखोर अपना सामान खपा लेते हैं। रिपोर्ट फेल होने पर उन पर जुर्माना लग जाता है।
दूध से निर्मित पदार्थों में मिलावट ज्यादा
जिले में दूध, पनीर और मावा से बनीं मिठाइयों के नमूने सबसे ज्यादा फेल होते हैं। कई बार सिंथेटिक मावा, पनीर व दूध पकड़ा जा चुका है। जिले में दूध का उत्पादन कम है, जबकि इसकी खपत अधिक है।
आंकड़ों पर एक नजर
एक अप्रैल से अब तक हुए सैंपल- 56
लिए गए सैंपल की आई रिपोर्ट- 46
दर्ज कराए मुकदमे- 32
निस्तारित हुए मामले- 24
निस्तारित मामलों पर लगा जुर्माना- 4.46 लाख
मिलावटखारों पर शिकंजा कसा जा रहा है। टीमों द्वारा लगातार सैंपलिंग की जा रही है। रिपोर्ट फेल होने पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। लोगों को मिलावटखोरी से बचने के जागरूक भी किया जाता है। - केके त्रिपाठी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी