एटा। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में जनता की सुविधा के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत पर सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया है। साथ ही प्रत्येक शौचालय पर एक केयर टेकर की तैनाती भी की गई है। इससे कि गांव को खुले में शौच से मुक्त किया जा सके और लोगों को सुविधा उपलब्ध हो। इस सबके लिए हर महीने जिले में 34.14 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन नतीजा कुछ हासिल नहीं हो रहा। सामुदायिक शौचालयों में कहीं गंदगी तो कहीं ताले लगे रहने का मर्ज दूर नहीं हो पा रहा।
जिले की सभी 569 ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। इससे कि ग्रामीण क्षेत्र में लोग खुले में शौच करने से बचें और गांव को खुले में शौच से मुक्त किया जा सके, लेकिन स्थिति वास्तविकता बिल्कुल ही उलट है। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय को गांव के बाहर बनाया गया है। जहां महिलाएं नहीं जा सकतीं। वहीं पुरुष जाएं भी तो इन शौचालयों में साफ-सफाई नहीं मिलती। जिसकी वजह से लोग इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। कई जगह ताले पड़े रहते हैं।
तैनात किए गए केयर टेकर रहते हैं नदारद
पंचायत राज विभाग के अनुसार प्रत्येक सामुदायिक शौचालय पर एक केयर टेकर की तैनाती की गई है। इनको स्वयं सहायता समूह द्वारा चयनित किया गया है। हर केयर टेकर को प्रतिमाह 6000 रुपये मानदेय दिया जाता है। ताकि शौचालय का संचालन और समय से साफ-सफाई होती रहे, लेकिन अधिकांश ग्राम पंचायतों में लोगों की शिकायत है कि केयर टेकर प्रतिदिन शौचालय पर आते ही नहीं हैं।
11.38 करोड़ की लागत से बने सामुदायिक शौचालय
ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीणों की सुविधा के लिए सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया गया है। इसमें एक शौचालय की निर्माण लागत न्यूनतम 2 लाख रुपये है। इसके हिसाब से सभी 569 शौचालयों की निर्माण लागत की बात करें तो 11 करोड़ अड़तीस लाख रुपये से इनका निर्माण हुआ है।
सभी सामुदायिक शौचालयों पर केयर टेकर तैनात किए गए हैं। अगर वह नियमित कार्य नहीं कर रहे हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। अन्य कोई समस्या है तो उसका भी समाधान कराया जाएगा। -केके सिंह चौहान, डीपीआरओ