यूनानी चिकित्सा पद्धति सबसे पुरानी : डॉ. जफर
देवरिया। हकीम, स्वतंत्रता संग्राम व समाजसेवी अजमल खान का जन्म दिवस यूनानी डे के रूप में मनाया गया। शहर के कलिंद इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में संबोधित करते हुए डॉ. जफर अनीस ने कहा कि हकीम अजमल खान के जन्मदिन को हर वर्ष यूनानी दिवस के रूप में मनाया जाता है। यूनानी चिकित्सा पद्धति विश्व की सबसे पुरानी पद्धतियों में एक है, जिसकी शुरुआत हकीम बुकरात (हिप्पोक्रेट-फादर ऑफ मेडिसिन) ने की थी, जो काफी समय से इस्तेमाल की जाती रही है तथा केंद्र सरकार की ओर से मान्य भारतीय चिकित्सा पद्धतिं है। डॉ. गौसूल आजम ने कहा कि यह पद्धति मुख्यत: रक्त, कफ, पीला और काला पित्त पर आधारित है। डॉ. जेड हक ने कहा कि यूनानी चिकित्सा पद्धति प्राकृतिक एवं होलिस्टिक तरीके से प्रत्येक मरीज के व्यक्तिगत मिजाज के हिसाब से रोगों का इलाज करती है। डॉ. रईस ने कहा कि यूनानी पद्धति से शरीर पर कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होता है। यह दौड़-भाग की जिंदगी से उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए सस्ती, सुलभ चिकित्सा पद्धति है। डॉ. एपी वर्मा ने कहा कि इस पद्धति में माजून सफूफ, टैबलेट आदि के रूप में नेचूरल दवाओं तथा हिजामा स्टीम थेरेपी, लीच एक्सर साईज, मसाज, फसद, हमाम, ओरमा थेरेपी आदि से थेरेपी का इस्तेमाल होता है। डॉ. तूफेल खान ने कहा कि इस पद्धति में स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और रोगों की रोकथाम के लिए कई तरह से उपचार किया जाता है। डॉ. मुनीर ने कहा कि चार अंजीर रात में भींगो कर सुबह दूध के साथ लेने से कब्ज सही हो जाता है। इस दौरान डॉ. एमडी अंसारी, यासीन अंसारी, डॉ. हसन फहीम, डॉ. शाहिद जमाल, डॉ. मैनुद्दीन अंसारी, डॉ. इरशाद खान, डॉ. यासीन अंसारी, डॉ. एपी वर्मा, डॉ. अशरफ सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।