रुद्रपुर। महेशपुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवर को में श्रीराम जन्मोत्सव मनाया गया। कथा में श्रीराम सहित चारों भाइयों की मनोहारी झांकी ने मन मोह लिया। इस दौरान जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा पंडाल गूंजता रहा। कथा वाचक ने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों के हृदय में निवास करते हैं। भक्ति की निर्मलता को ही स्वीकार करते हैं। जो भक्ति निष्कपट हृदय से की जाती है, वही भगवान को प्रिय होती है। भगवान श्रीराम का जन्म जगत में मर्यादा और नैतिकता की रक्षा के लिए हुआ था। उन्होंने श्रीराम को भक्त और भक्ति की मर्यादा का प्रतीक बताया। कथा के दौरान जब भगवान श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग आया तो पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। महिलाओं ने झांकी पर पुष्पवर्षा की। उन्होंने बताया कि कैसे राजा दशरथ के घर श्रीराम का जन्म हुआ, जिससे अयोध्या में खुशी और मंगलमय वातावरण छा गया। राम जन्म की कथा सुनने से भक्तों को अत्यंत खुशी मिलती है। संवाद