देवरिया। मौसम के तेजी से बदलाव के बीच लोग अजीब दुविधा में फंस गए हैं। समझ नहीं पा रहे कि पंखा चलाएं या कंबल ओढ़ें। इसी में थोड़ी सी भी लापरवाही उन्हें बीमार कर दे रही है। दरअसल, दिन में गर्मी और रात में ठंड के बीच अधिकतम और न्यूनतम तापमान में दोगुने तक का अंतर हो रहा है। मौसम के इस व्यवहार को विशेषज्ञ सेहत के लिए खतरनाक मान रहे हैं। ऐसे में जो लोग सुबह में घर से निकलते समय लापरवाही बरत रहे हैं, शाम को लौटते समय, यह उनके लिए भारी साबित हो रही है। यही वजह है कि इन दिनों बुखार और जुकाम के मरीज बढ़ गए हैं। चिकित्सक ऐसे में बचाव की सलाह दे रहे हैं।
बुधवार का अधिकतम तापमान 27 तो न्यूनतम 13 और बृहस्पतिवार का अधिकतम 28 एवं न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो नवंबर माह में अधिकतम तापमान 30 एवं न्यूनतम 10 डिग्री के नीचे या इससे कुछ ही अधिक रहा है। विशेषज्ञ मौसम के इस परिवर्तन को ग्लोबल वार्मिंग और हवा की खराब गुणवत्ता को इसकी वजह मान रहे हैं। बीआरडी पीजी कॉलेज के भूगोल विभाग के डॉ.उदयभान ने बृहस्पतिवार को बताया कि गांवों में अभी भी लोग पराली जला रहे हैं। इससे वायुमंडल में कार्बन डाई आक्साइड की सांद्रता बढ़ रही है। ग्लोबल वार्मिंग से कार्बन डाई आक्साइड, लीथेन, नाइट्रस आक्साइड जलवाष्प, एसी व फ्रीज से क्लोरो फ्लोरो कार्बन निकलने से गर्मी अभी भी वातावरण में महसूस हो रही है। नवंबर माह में गर्मी लगने का मुख्य कारण प्रदूषण ही है। 15 दिसंबर के बाद पश्चिमी विक्षोभ आने से भारतीय फसलों में गेंहू व हिमांचल, काश्मी, उत्तरांचल में सेब की फसलों को फायदा होगा। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से उठते हुए इरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान होते हुए भारत में आता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश आते-आते इसका 80 प्रतिशत प्रभाव कम हो जाता है। ठंड में एक बार बारिश हो गई तो मौसम साफ हो जाएगा। ठंडी में जो बारिश होती है, उसमें 10 प्रतिशत योगदान इस विक्षोभ का होता है।
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चिकित्सक दे रहे मास्क लगाने की सलाह
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभाग के डॉ.अनुराग शुक्ला ने बताया कि बढ़े प्रदूषण के चलते सांस के साथ ही जुकाम व बुखार के रोगियों की संख्या भी बढ़ी है। वायु प्रदूषण मानव शरीर के हर अंग को नुकसान वस्तुत: प्रत्येक कोशिका को नुकसान पहुंचाता है। हर दिन 60 से 70 मरीज ऐसे आ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि बाहर निकले तो मास्क का प्रयोग जरूर करें।
गेहूं की बोआई में मौसम के अनुसार पर्याप्त नमी जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना भाटपाररानी के वैज्ञानिक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने बृहस्पतिवार को बताया कि मौसम में अचानक परिवर्तन जैसे दिन में गर्मी और धूप, पछुआ हवा और रात में ठंडी हवा से मौसम में बार-बार हो रहे बदलाव से मनुष्य पर इसका प्रभाव पड़ता है। इस समय गेहूं की बुवाई तेजी से हो रही है। किसान भाई ऐसे मौसम में खेत में पर्याप्त नमी रहे तभी गेहूं की बुवाई करें। ताकि गेहूं के बीजों का अंकुरण व जमाव अच्छे ढंग से हो सके। दलहन और तिलहन फसलों के जैसे चना, मटर,सरसों आदि की सिंचाई आवश्यक है। इससे फसलों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। पर्याप्त नमी होने से इनमें वृद्धि और विकास तेजी से होगा।
नवंबर में वर्षवार तापमान
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2017 32.5 8.3
2018 32.2 11.8
2019 31.3 12.6
2020 32.6 9.8
2021 32.3 12.5
2022 32.4 11.6
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