प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने मंदिर आंदोलन की यादें साझा कीं
-पिता जी को 30 दिन बस्ती और खुद 20 दिन था देवरिया जेल में
- रथयात्रा को बिहार सरकार ने रोका तो कसया तहसील में किया सत्याग्रह
देवरिया। राममंदिर आंदोलन में क्या नहीं सहा...पुलिस की लाठियां खाईं। साथियों को पिटते देखा। पिता को जेल जाते देखा तो खुद पर रासुका की कार्रवाई झेली। लेकिन अब जब भव्य मंदिर सामने दिख रहा है तो बीती बातों का कोई मायने नहीं है। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही बताते हैं कि अपने अंदर के इस संतोष वह शब्दों में बयां नहीं कर सकते।
राममंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने पुरानी यादों को साझा किया। कहा, 1989 में रथयात्रा की कुशीनगर से बस्ती तक अगवानी की जिम्मेदारी मिली थी। पुलिस की सख्ती के बावजूद इसके लिए सैकड़ों कारसेवक जुटे थे। तभी बिहार में तत्कालीन लालू सरकार ने रथयात्रा को रोक दिया। जैसीे ही इसकी सूचना यहां मिली कारसेवकों ने कसया तहसील पर सत्याग्रह कर भगवा झंडा लहरा दिया।
पुलिस और सख्त हो गई। कारसेवकों पर ऐसी लाठियां चलाई कि अनिरुद्ध मिश्र और दिव्यांग भूलन सिंह के हाथ-पैर फ्रैक्चर हो गए। पिता राजेंद्र किशोर शाही को गिरफ्तार कर बस्ती जेल भेज दिया गया। शाही बताते हैं कि उन्हें देवरिया जेल भेजा गया। जहां न सिर्फ वह 20 दिन रहे बल्कि रासुका की कार्रवाई भी हुई। दो माह तक घर छोड़कर रहना पड़ा। शाही बताते हैं कि 1992 में अयोध्या में जब विवादित ढांचा ध्वस्त हुआ तब भी वह जेल में थे। जेल से ही टीवी ढांचा ध्वस्त होते देखा। वह भी एक दिन थे कि राम का नाम तथा अयोध्या जाना पुलिस की नजर में अपराध था। आज भगवान श्रीराम की ऐसी महिमा हुई कि भव्य मंदिर का सपना साकार हो रहा है।
पुलिस से हुआ सामना तो उपले की आड़ में गुजारनी पड़ी रात
-भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अनिरुद्ध मिश्र ने बताया कि 1992 में अयोध्या जाने वाले कार सेवकों का कुशीनगर और देवरिया में भोजन और पुलिस से बचाकर जिला पार कराने जिम्मेदारी थी। भाजपा में होने के कारण पुलिस की नजर रहती थी। पुलिस से बचकर कार्य करना पड़ता था। कसया से लौटते समय रात में पुलिस ने दौड़ा लिया। शहर के गोशाला के पास रखे गए उपले में छिप कर रात गुजारनी पड़ी थी। इसके बाद किसी तरह सुबह बाइक से गांवों के रास्ते छिप-छिप कर पिंडी पहुंचे, जहां पहले से कारसेवकों के बैठक की भनक पुलिस को लग चुकी थी। वहां से किसी तरह बचकर सलेमपुर पहुंचे तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मंडी समिति में बनाई गई अस्थायी जेल में पांच दिन तक रहना पड़ा था। विवादित ढांचा ध्वस्त होने पर जय श्रीराम के जयकारे से जेल परिसर गूंज उठा था। आज भव्य मंदिर में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर उत्साहित हूं।