- पूतना वध के समय जय श्रीकृष्ण के नारों से गूंजा पंडाल, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर महिलाओं ने गाए सोहर
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनूघाट। श्री चिरंजी ब्रह्म सेवा समिति सोंदा की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन वृंदावन धाम से पधारे कथा वाचक डॉ. श्याम सुंदर पराशर ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई। इस दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की झांकी देखकर सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
डॉ. पराशर ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए कहा कि उग्रसेन का पुत्र कंस जो बहुत ही आतताई था। जिसने अपने पिता उग्रसेन को मथुरा के कारागार में बंद कर दिया। अपनी चचेरी बहन देवकी के विवाह के समय देवकी वासुदेव को ससुराल स्वयं रथ पर सवार होकर पहुंचाने जा रहा था। उसी समय आकाशवाणी हुई। रे कंस! तू जिसको अपने रथ पर सवार होकर विदा कर रहा है, उसी के गर्व से उत्पन्न पुत्र तेरी मौत का कारण बनेगा?
आकाशवाणी सुनते ही कंस आग बबूला होकर देवकी को मौत के घाट उतारने की बात सोचने लगा। वासुदेव ने कंस को वचन दिया कि देवकी के गर्भ से जो भी उत्पन्न संतान होगा वह आपको हम सुपुर्द कर देंगे। समय आने पर अपने किए वादे पर खरा उतर कर वासुदेव ने देवकी की संतान को कंस के समक्ष रखा। कंस अपने बहनोई वासुदेव के किए वादे पर खरा उतरने पर लज्जित हुआ। लेकिन नारद द्वारा पहला या आठवां गणित समझाने पर कंस ने कहा कि काल तो काल होता है। देवकी वासुदेव को कारागार में बंद करा दिया।
भाद्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को श्रीकृष्ण का जन्म होते ही देवकी वासुदेव के हाथ पैर की बेड़ियां खुल गईं। कारागार के द्वार पर सुरक्षा में लगे द्वारपाल गहरी नींद में सो गए। श्रीकृष्ण जन्म की झांकी देख सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के समय श्रोताओं ने बेनी, टॉफी और मिठाइयां लुटाईं। वहीं महिलाओं ने सोहर गाकर खूब बधाइयां लूटीं।
वासुदेव ने भगवान श्रीकृष्ण को वर्षा की अंधेरी रात में टोकरी में रखकर यमुना पार कर नंद बाबा के आंगन में रख दिया। मां यशोदा की गोद में सो रही शक्ति को लेकर पुन: कारागार में आते ही बेड़ियां देवकी वसुदेव के हाथों और पैरों में लग गईं। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर सोए द्वारपाल जग गए और यह खबर कंस को दी। कंस ने कारागार पहुंचकर जन्मे बच्चे को हाथ में लेकर जमीन पर पटकना चाहा। हाथ से बच्ची छुटकर आकाश में उड़ गई, और बोली रे दुष्ट! कंस तो मुझे क्या मारेगा? तुझे मारने वाला तो गोकुल में पैदा हो चुका है।
कंस यह सुनते ही आश्चर्यचकित हो गया। बहन पूतना को गोकुल में पैदा हुए एक सप्ताह के भीतर जन्म लेने वाले सभी बच्चों को अपने स्तन में विष लगाकर स्तनपान कराकर सभी को मारने का आदेश दिया। पूतना वध के समय पूरा पंडाल जय श्रीकृष्ण के नारों से गुंजायमान हो गया।
कार्यक्रम की शुरूआत पूर्व विधायक डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी, अंगद तिवारी ने आरती कर किया। मंचासीन अतिथियों को कथा व्यास डॉ. श्याम सुंदर पराशर ने श्री राधे की पट्टिका लगाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर संजय शंकर मिश्र, केशव मिश्र, अनिल मिश्र, रविप्रकाश मिश्र छोटे, दीपक मिश्र, मनीष शुक्ल, मृत्युंजय शास्त्री, चंदन आदि मौजूद रहे।