देवरिया। डेढ़ साल पहले स्वीकृत हुईं जिले की 32 सड़कों का निर्माण लैब जांच के फेर में अटक गया है। ये सड़कें एफडीआर तकनीक से बनाई जानी हैं। लैब से रिपोर्ट आने में हो रही देरी के चलते विभाग भी हाथ पर हाथ धरे बैठ गया है। इधर, सड़क निर्माण नहीं होने के कारण 15 लाख से अधिक आबादी दर्द दे रहे गड्ढायुक्त सड़कों से आवाजाही को मजबूर है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत करीब 18 माह पहले ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की 35 सड़कों के निर्माण की मंजूरी मिली थी। एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक से प्रस्तावित इन सड़कों से मिट्टी का नमूना ठेकेदार और विभागीय इंजीनियरों की देखरेख में एकत्र किया गया। ये नमूने ठेकेदारों ने उसी दौरान सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त अलग-अलग लैब में जांच के लिए भेज दिए। अभी तक सिर्फ भलुअनी ब्लाॅक के बखरी से रतसिया, भलुअनी से महुईं श्रीकांत, पैना गढौना मार्ग समेत तीन सड़कों की रिपार्ट आई है। शेष 32 सड़कों का निर्माण रिपोर्ट नहीं आने के कारण शुरू नहीं हो पा रहा है।
इन सड़कों का अटका है निर्माण
बेलडाड़-देवरिया मार्ग, महेन लबकनी गंगाचक से करायल शुक्ल मार्ग, टी10 बारा से भीखमपुर, लार भाटपाररानी रोड के किमी एक से परासी चकलार मार्ग, मुंडेरा बाबू से नौतन हथियागढ, देवरिया-बसडीला मार्ग, नूरीगंज से सल्लहपुर-बनकटा शिव मार्ग, भटनी-भाटपाररानी मार्ग, खोरीबारी से फतेहपुर, गोबराई से चकिया, महदहा से मजुरी, टी वन से सिरिसिया, घाटी से खैराट, धूस देवरिया से आनंद नगर, नौतन हथियागढ वाया जिगनी राजा, गढ़रामपुर से तिरमुहानी, ककवल खैरा बनुआ चोरिया सोहसर, कोल्हुआ पड़री झिल्लीपार, भटनी से बैकुंठपुर, पथरदेवा से विशुनपुर, पथरदेवा विशुनपुर रोड से कौलमुंडेरा वाया भैसाडाबर, बघौचघाट पकहा रोड से पांडेयपुर वाया सुंदरपुर, चकजगबंधन मिश्रौली से मलघोट विरैचा महुआनी, खुखुंदू नूनखार रोड वाया असना, ससरांव बुजूर्ग से भेलउर मार्ग, सलेमपुर चेरा मार्ग, लार रोड से धरहरा वाया नेमा, लार चनुकी रामनगर से डोगरी राजमल, खरवनिया पांडेय मार्ग, सलेमपुर भाटपाररानी मार्ग से बनकटा आदि सड़कों का निर्माण कार्य अटका पड़ा है।
-बोले राहगीर:
जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली देवरिया-बेलडाड़ सड़क तीन साल से जर्जर है। जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। डेढ़ साल पहले पता चला था कि यह सड़क बनने वाली है। अबतक काम शुरू नहीं हुआ है।
- जगदीश यादव, राहगीर
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भटनी-भाटपाररानी मार्ग पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। इसपर चलने से बाइक का शॉकर खराब हो जा रहा है। जनप्रतिनिधि बस आश्वासन दे रहे हैं। निर्माण नहीं कराया जा रहा है।
- ओमप्रकाश सिंह, राहगीर
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मजबूत होती है एफडीआर तकनीक से बनी सड़क
इंजीनियर अनूप पांडेय ने बताया कि एफडीआर तकनीक से बनी सड़क आम सड़क से कई गुना मजबूत और सस्ती है। एफडीआर तकनीक एक रिसाइकिलिंग पद्धति है। इसमें कच्ची सड़क को उखाड़कर सड़क में से निकलने वाली सामग्री को प्लांट पर ले जाया जाता है। यहां पर सड़क के वेस्ट मटेरियल में केमिकल व आवश्यक सामग्री के साथ मिलाकर नया मटेरियल तैयार कर वापस से सड़क पर लगाकर डाला जाता है। हवा के प्रेशर से अच्छे से धूल को साफ करने के बाद उस पर फैलिक कपड़े को बिछाया जाता है, ताकि वह नमी को सोख सके। इसके बाद उसके ऊपर डामर की एक परत डाली जाती है। फिर मटेरियल को उस पर डालकर रोलर चलाया जाता है।
वर्जन
35 में तीन सड़कों की लैब जांच रिपोर्ट आ गई है। इनपर काम शुरू हो गया है। शेष 32 सड़कों की रिपोर्ट न आने के कारण निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। रिपोर्ट आने पर प्रस्तावित स्थल पर मिट्टी की मजबूती का पता चल पाएगा। जितनी गहराई पर मिट्टी मजबूत मिलेगी वहीं से निर्माण प्रारंभ किया जाएगा।
- रामअवध यादव, एक्सईएन ग्रामीण अभियंत्रण विभाग।