टेक्नीशियन की कमी से धूल फांक रहे वेंटीलेटर, निजी में पांच हजार रुपये किराया
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज की स्थापना के 22 माह बाद मरीजों को वेंटीलेटर के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसके कारण मरीजों को पांच हजार से अधिक रुपये 24 घंटे के लिए देने पड़ रहे हैं। टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारियों के अभाव में 40 वेंटीलेटर स्टोर में बंद हैं। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
कोरोना संक्रमण काल में महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में आईसीयू बनाने के लिए 40 वेंटीलेटर आए थे। टेक्नीशियन और प्रशिक्षित चिकित्सकों व स्टाफ की कमी से इसका संचालन नहीं हो सका। हालत यह है कि मेडिकल कॉलेज आने वाले गंभीर मरीजों को वेंटीलेटर के अभाव में रेफर करने के शिवाय कोई अन्य उपाय नहीं है।
हर रोज करीब 15 से 20 मरीजों को जिंदगी बचाने के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज और शहर के निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्राइवेट में 24 घंटे वेंटीलेटर का किराया पांच से दस हजार रुपये होने के कारण गरीबों की कमर टूट जा रही है। मजबूरी में वह कर्ज के जाल में भी फंस जा रहे हैं। हालत यह है कि पीआईसीयू में भी टेक्नीशियन की कमी है। पांच की जगह दो ही मौजूद हैं।
बेहोशी के तीन और रेडियोलाॅजिस्ट की भी कमी
मेडिकल कॉलेज में वेंटीलेटर को संचालित करने के लिए पांच एनेस्थीसिया (बेहोशी) के डॉक्टर चाहिए। इसके अलावा करीब अस्सी टेक्नीशियन, ट्रेंड स्टाफ नर्स व अन्य कर्मचारी चाहिए। इसी तरह मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड और ईसीजी कराने के लिए भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड का हाल यह है कि रेडियोलाॅजिस्ट की कमी से मरीजों को पुरुष अस्पताल में 10 से 15 दिन की वेटिंग और महिला में भोर से ही नंबर लगाकर पहले आओ और पहले पाओ की तर्ज पर 30 से 35 अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है।
सीएचसी, पीएचसी पर भी हालत खराब
जिले के सीएचसी और पीएचसी पर भी अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। इन जगहों पर रेडियोलाॅजिस्ट की कमी है। मरीजों को निजी सेंटरों पर जांच करानी पड़ती है।
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आठ फरवरी को बेटी दुर्घटना में घायल हो गई। मेडिकल कॉलेज देवरिया पहुंचे। सुविधा न होने के कारण रेफर कर दिया गया। गोरखपुर निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां करीब दस हजार रुपये देने पड़े।
- रामप्रवेश कुमार, अवराचौरी
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वेंटीलेटर न होने के कारण जरूरी होने के बाद भी सरकारी अस्पताल में मरीजों को भर्ती नहीं करा सका। निजी अस्पताल जाना पड़ा। एक दिन का पांच हजार रुपये चार्ज अस्पताल संचालक मांग रहे थे।
वेद प्रकाश, अगस्तपार
कोट
मानव संसाधन की कमी के कारण वेंटीलेटर का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। आने वाले दिनों में समस्या का समाधान हो जाएगा।
-डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस