देवरिया जिले के दो नदियों के बीच बसे दोआबा के दो लाख लोग एक माह से अपने घरों में कैद हैं। पिड़रा पुल का एप्रोच धंसने और सड़क कटने से बाधित रास्ता 32 दिनों बाद भी बहाल नहीं हो पाया है। दोआबा का मुख्य द्वार कहे जाने वाले पिड़रा पुल पर कटान के कारण दोनों ओर पुलिस का पहरा लग गया है। एक माह से कटान रोक कर रास्ता चालू करने की कोशिश में जुटा पीडब्लूडी पूरी तरह असफल साबित हो रहा है।
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दीपावली के दिन हुई भीषण कटान से बचा एप्रोच भी कट कर नदी में विलीन हो गया। एक माह में तीन बार गोर्रा नदी पीडब्लूडी के किए धरे पर पानी फेर चुकी है। कटान पाटने को बुधवार को गिराई गईं पेड़ों की टहनियों और मिट्टी से भरी बोरियों को फिर नदी बहा ले गई। स्थिति नियंत्रण में होने का लगातार दावा करने वाला प्रशासन पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है। रास्ता बहाल होने में देरी से अब लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा है।
सपा नेता हरेंद्र सिंह त्यागी और सब्बीर अहमद ने कहा कि प्रशासन ने दोआबा की दो लाख आबादी को उनके हाल पर छोड़ दिया है। रास्ता बंद होने से लोगों की माली हालत बिगड़ती जा रही है। कार्यदायी संस्था की लापरवाही और प्रशासन की उदासीनता के कारण रास्ता चालू नहीं हो पा रहा है। यदि एक सप्ताह में रास्ता बहाल नहीं हुआ तो दोआबा के लोगों को लेकर पिड़रा पुल पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
पिड़रा के पक्के पुल का एप्रोच कटने से आठ किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 30 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ रहा है। इस कारण आने-जाने का किराया भी बढ़ गया है। पचलड़ी, रमपुरवा, सरांव, भेड़ी बकरुआ आदि 52 गांवों के लोगों को तहसील मुख्यालय आने के लिए 20 रुपये की जगह 40 रुयये किराया देना पड़ रहा है। वहीं, ये लोग जान जोखिम में डाल कर नरायनपुर से बहोरादलपतपुर होकर बंध पर संकरे मार्ग से यात्रा कर रहे हैं। इस मार्ग से चलने वाली गाड़ियों के 40 फीट नीचे खाई में गिरने का डर बना हुआ है।
चौपट हो गया छोटे दुकानदारों का धंधा
पुल का एप्रोच कटने बाद बंद रास्ते के कारण पचलड़ी चौराहे के ठेला, खोमचा वालों से लेकर दुकानदारों के कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। यहां सब्जी, अंडा, मुर्गा, मछली, मूंगफली आदि बेचने वालों का धंधा चौपट हो गया है। चौराहे के दुकानदारों की बिक्री करीब 70 प्रतिशत कम हो गई है।
ईश्वरपुरा निवासी रामसहाई पासवान पचलड़ी चौराहे पर फल का ठेला लगाते हैं। उन्होंने कहा कि पहले दिन भर में 10 हजार रुपये तक फल की बिक्री हो जाती थी। आवागमन बंद होने से तीन से चार सौ रुपये तक ही फल बिक पा रहा है। ग्राहक नहीं आने से ज्यादातर फल खराब हो जा रहे हैं। पचलडी निवासी मूंगफली के दुकानदार नीरज वर्मा ने कहा कि पहले एक हजार की मूंगफली बेच देता था। अब मुश्किल से सौ दो सौ रुपये की मूंगफली बिक रही है।
सरांव बुजुर्ग निवासी इंद्रजीत प्रसाद पकौड़ी की दुकान लगाते हैं। वह रोज पांच से सात हजार का धंधा कर लेते थे, आवागमन बंद होने के बाद किसी तरह दो चार सौ रुपये का धंधा हो रहा है। रुद्रपुर निवासी परमानंद चौरसिया जो चौराहे पर चाउमीन का ठेला लगाते हैं । पहले दो से तीन हजार रुपये का बिक्री करते थे। अब एक हजार का भी काम नहीं हो पा रहा है। पचलड़ी चौराहे के सभी दुकानदारों की बिक्री पर भारी असर पड़ा है।
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बाढ़ से जिन जगहों पर इस बार कटान हुई है, उसके बार में जानकारी जुटाई जा रही है। नवंबर में नया प्रोजेक्ट बना कर शासन को भेजा जाएगा। ताकि बाढ़ के समय कोई दिक्कत न हो, क्योंकि 1998 से अधिक जलस्तर इस बार रहा है। इसके बाद भी जनहानि नहीं हुई है। इससे साफ जाहिर होता है कि जो कार्य किए गए हैं, उसका फायदा मिला है।