मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा, बर्न, टॉक्सिकोलॉजी वार्ड बनेंगे
अभी ऐसे मामले आने पर गोरखपुर मेडिकल रेफर कर दिए जाते हैं मरीज
इमरजेंसी में हर रोज करीब दो सौ मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नए साल में मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से मरीजों को एक ओर जहां बेहतर चिकित्सकीय सुविधाएं मिल सकेंगी। वहीं, दूसरी ओर उन्हें दूर-दराज जाने से भी छुटकारा मिलेगा। प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेज में 30 बेड का ट्रॉमा सेंटर, 20 बेड का बर्न वार्ड और 20 बेड का टॉक्सिकोलॉजी वार्ड बनाने की स्वीकृति दे दी है। ऐसे में अब अपने जिले में ही गंभीर मरीजों का इलाज हो सकेगा। अभी इनसे संबंधित मरीजों को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
महर्षि देवरहा बाबा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के शुरू होने के बाद लोगों को लगा कि अब उन्हें इलाज के लिए कहीं और नहीं जाना पड़ेगा। यहां जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा बिहार प्रांत के सीमावर्ती गांवों के लोग इलाज कराने आते हैं। गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा न होने से लोगों को दिक्कतें आती हैं। इसके लिए ट्रामा सेंटर की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
इमरजेंसी में हर रोज करीब दो सौ मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। इसमें औसतन तकरीबन 30 दुर्घटना में घायल पहुंचते हैं। इसमें गंभीर 10 घायलों को रेफर करना पड़ता है। वहीं, ठंड के मौसम में आग से झुलसे तीन से पांच मरीज आते हैं। उनका इलाज सर्जिकल वार्ड के बरामदे में होता है। ऐसे में उन्हें इंफेक्शन का खतरा रहता है। वहीं, प्वाइजनिंग के भी मामले इमरजेंसी में पहुंचते हैं। इनमें गंभीर मरीजों के लिए भी इलाज की समुचित सुविधा नहीं है। ऐसे मरीजों को टॉक्सिकोलॉजी वार्ड बन जाने पर कहीं और नहीं जाना पड़ेगा और उनका बेहतर इलाज हो सकेगा।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल यहां ट्रॉमा सेंटर बनाने की मांग कर रहे थे। प्राचार्य ने इमरजेंसी के समीप भूमि चिह्नित कर प्रस्ताव भेजा था। जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में हरी झंडी दे गई है। अब धन अवमुक्त होते ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
1393 वर्ग मीटर में तीन मंजिला होगा भवन
देवरिया। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी के सामने ट्रॉमा सेंटर के लिए भूमि चिह्नित की गई है। यहां तकरीबन 25 करोड़ रुपये की लागत से 1393 वर्ग मीटर के एरिया में स्थापित होगा। यह भवन तीन मंजिला होगा। इसके लिए मानचित्र भी तैयार है। भूमि तल के बाद प्रथम तल 1361 तथा द्वितीय तल 1172 वर्ग मीटर में होगा। यहां सोलर पॉवर जेनरेटर सिस्टम, स्ट्रीट लाइट, रेन कटर हार्वेस्टिंग, अंडर ग्राउंड सीवर की व्यवस्था होगी। घायल व अन्य गंभीर मरीजों, आग से झुलसे तथा प्वाइजनिंग के गंभीर मरीजों को इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
70 बेड का होगा ट्रॉमा सेंटर, ये होंगी सुविधाएं
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में एल-वन कटेगरी का ट्रॉमा सेंटर स्थापित होगा। यह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। इसमें कुल 70 बेड होंगे। इसमें ट्रॉमा, बर्न तथा टॉक्सिकोलॉजी वार्ड होंगे। ट्रॉमा के लिए अधिक तीस बेड, जबकि अन्य दोनों वार्डों में बीस-बीस बेड होंगे। यहां मॉड्यूलर ओटी, माइनर ओटी, मेडिकल पाइप लाइन, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, इंफ्यूजन पंप, मॉनीटर सहित अन्य अत्याधुनिक उपकरण होंगे। बर्न वार्ड पूर्ण रूप से वातानुकूलित होगा। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा दक्ष पैरा मेडिकल व स्टाफ नर्स रहेंगी।
कोट
मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। प्रदेश सरकार ने कैबिनेट की बैठक में निर्माण के लिए मंजूरी दे दी है। बजट मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। ट्रॉमा सेंटर के बन जाने से मरीजों और तीमारदारों को काफी सहूलियत होगी। उन्हें इलाज के लिए कहीं बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
-डॉ. राजेश कुमार बनरवाल, प्राचार्य, महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज