- विशेषज्ञों की अपील और नियमों को ताक पर रख जिलेवासियों ने आतिशबाजी में खर्च कर डाले पांच करोड़ रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। दीपावली पर जमकर पटाखा जलाने से निकले जहरीले धुएं से जिले की आबोहवा और खराब हो गई है। आलम यह है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (आईक्यूआई) 165 तक पहुंच गया है। वातावरण में सुबह व शाम को धुंध की चादर फैल जा रही है। इसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। इस वक्त सैर पर निकलने वालों की दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। मेडिकल कॉलेज के आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं।
दीपावली पर रविवार की रात शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में हर जगह आतिशबाजी की गूंज रही। जागरूकता एवं अपील के बावजूद जनपदवासियों में क्षण भर के आनंद के लिए पैसे खर्च करने में कंजूसी नहीं बरती। पर्व पर देर रात तक जिलेवासियों ने पांच करोड़ का पटाखा जला दिया। इससे जिले में ध्वनि के साथ ही प्रदूषण का स्तर भी बढ़ गया है। आईक्यूआई बढ़ने से लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगी है। जागरूकता एवं विशेषज्ञों की अपील के बाद भी दीपावली पर पटाखा जलाने से निकलने वाले धुएं से हवा में जहर घुल रहा है।
वहीं वाहनों के बढ़ने और उससे निकलने वाले धुएं के कारण भी वायु प्रदूषित हुई है। चीनी मिल ग्राउंड सहित जिले के विभिन्न जगहों पर लगीं पटाखे की दुकानों से इस बार अधिक बारूद वाले सहित अन्य तेज आवाज वाले पटाखे खरीदने में किसी ने कोई कोताही नहीं बरती। एक अनुमान के मुताबिक जनपद में इस बार पांच करोड़ के पटाखे बिके। पर्व पर जमकर हुई आतिशबाजी से निकली जहरीली गैसों ने वातावरण में हवा के स्तर को और खराब किया है। साथ ही प्रदूषण को भी काफी बढ़ा दिया है। ऐसे में सांस और हृदय संबंधी रोगियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन की सेटेलाइट नहीं पकड़ पा रही जलती हुई पराली
धान की फसल कटने के बाद खेतों में बचे अवशेष को जलाने पर शासन की ओर से रोक लगाई गई है। ऐसे लोगों को चिह्नित कर उन पर केस दर्ज कराने का आदेश दिया गया है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में पराली जलाने से लोग बाज नहीं आ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि खेतों में पराली जलाने से प्रदूषण में इजाफा होता ही है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कमजोर होती है। जिला कृषि अधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह ने बताया कि फसल कटाई के बाद खेत में पड़े अपशिष्ट (पुआल) को नहीं जलाने का सख्त निर्देश है। सेटेलाइट के माध्यम से किसानों के खेतों की निगरानी की जा रही है यदि किसान पराली जलाते हैं तो तत्काल पता चल जाता है कि किस अक्षांश-देशांतर पर जली है। लेखपाल एवं कृषि विभाग के कर्मचारी इसकी माॅनीटरिंग कर रहे हैं। दो एकड़ जलाने पर 2500 रुपये, 2-5 एकड़ पर पांच हजार, पांच एकड़ से ऊपर जलाने पर 15 हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया गया है। यदि किसान फसल के अवशेष को जलाते हैं तो प्रथम बार अर्थदंड एवं दूसरी बार जलाने पर अर्थदंड के साथ सरकारी योजनाओं के अनुदान से वंचित किया जा सकता है। पराली जलाने से खेत की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है, वहीं पर इससे निकलने वाले हानिकारक धुएं से पर्यावरण में प्रदूषण की वृद्धि होती है। यह जीव-जन्तु के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
दीपावली की रात हुई आतिशबाजी से प्रदूषण का स्तर बेहद बढ़ गया है। इससे 12, 13 व 14 नवंबर को जिले की आईक्यूआई 165 रही। 10 नवंबर को आईक्यूआई 159 थी। तीन दिन में ही अचानक जिले की आबोहवा खराब हुई है। यह मानव जीवन के अलावा जीव जंतुओं के लिए हानिकारक साबित हो रही है।
-प्रो. हरिशंकर गोविंद राव, वनस्पति विज्ञान के अध्यक्ष, बीआरडी पीजी कॉलेज
आतिशबाजी में ऐसे पटाखे जलाए गए हैं, जिनकी आवाज करने की क्षमता 85 डेसीबल से अधिक रही। 60 डेसीबल तक तो हमारे कान बर्दाश्त कर सकते हैं और नुकसान की संभावना कम होती है। इस बार रंग-बिरंगे पटाखों से दीपावली के दिन यह 140 डेसीबल तक रिकार्ड किया गया, जबकि ज्यादा शोर गर्भवती महिलाओं के शिशुओं को परेशान करने वाला है।
-डाॅ. उदयभान मद्धेशिया, भूगोल विभाग के शिक्षक, बीआरडी पीजी कॉलेज
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आतिशबाजी के कारण मौसम प्रदूषित हुआ है। इससे सांस, अस्थमा के रोगियों की संख्या बढ़ी है। मंगलवार को अन्य दिनों की अपेक्षा इसके मरीज भी अधिक आए। प्रदूषण के चलते आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ेगी।
-डॉ. सिराजुद्नीन, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज