पकड़ी बाजार। क्षेत्र के छोटकी धनगढिया गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार रात कथावाचक पं. प्रदुम्न पांडेय ने भगवान इंद्र और गोवर्धन पर्वत की कथा सुनाई। कथा सुनकर पंडाल में बैठे श्रोता भाव विभोर हो गए। कथावाचक ने बताया कि भगवान इंद्र की पूजा जब बृजवासियों ने नहीं की तो इंद्र भगवान क्रोधित होकर बृज को जलमग्न करने के लिए सामवर्तक मेघ को आदेश दिए। मेघों ने मूसलाधार बारिश की। भगवान ने बृजवासियों की रक्षा करने और उनके अभिमान को तोड़ने के लिए अपने कनिष्ठिका उंगली की नोक पर गोवर्धन पर्वत को धारण कर सात कोश के गोवर्धन को सात दिन तक भगवान ने उठाए रखा। फिर इंद्र ने आकर भगवान से क्षमा मांगी। भगवान ने इंद्र को क्षमा कर दिया। इसके आगे भी कथा का रसपान कराया।