पराली जलाने पर होगी दंडात्मक कार्रवाई, विक्रय कर पा सकते हैं लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। किसान फसल की कटाई के बाद खेत में पराली न जलाएं। सेटेलाइट के माध्यम से किसानों के खेतों की निगरानी की जा रही है। पराली जलाने पर जानकारी हो जाती है कि किस अक्षांश-देशांतर पर जली है। इस पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। इसमें दो एकड़ जलाने पर 25 सौ रुपये, दो से पांच एकड़ जलाने पर पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से ऊपर जलाने पर 15 हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया गया है। जबकि पराली का विक्रय कर लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
जिला कृषि अधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा है कि किसान फसल के अवशेष को जलाते हैं तो प्रथम बार अर्थदंड एवं दूसरी बार जलाने पर अर्थदंड के साथ सरकारी योजनाओं के अनुदान से वंचित किया जा सकता है। पराली जलाने से खेत की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है वहीं पर इससे निकलने वाले हानिकारक धुएं से पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता है। इसके कारण जीव-जन्तु के साथ मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। पराली जलाने से मृदा का तापमान बढ़ता है साथ ही मित्र जीव भी नष्ट हो जाते हैं। हैरो से जुताई कर खेत में पानी भरकर 40 किग्रा. यूरिया प्रति हेक्टेयर की दर से डाल दें, इससे अपशिष्ट पदार्थ सड़कर मृदा में खाद बनकर मृदा को उपजाऊ बनाएगा। इसके बाद खेत में गेहूं, चना, मटर, मसूर, सरसों आदि फसलों की बुआई करें।
पराली को जैव उर्जा नीति 2022 के तहत जनपद में सात एग्रीगेटर एफपीओ नामित की गई है। इसमें पूर्वांचल पोल्ट्री प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड देसही देवरिया, ओम किसान फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड देवरिया, देवरिया गौरीबाजार मशरूम प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड गौरीबाजार, भलुअनी मशरूम ग्रोवर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड भलुअनी, सुपीरियर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड पथरदेवा, जानकीनाथ कृष्णनंदन फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड पथरदेवा, आकर्षण एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड गौरीबाजार से संपर्क कर अपने पराली को विक्रय कर अवशेष से लाभ प्राप्त कर सकते हैं।