- रोजाना मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पहुंच रहे है 200 से अधिक मरीज, डॉक्टरों की सलाह जरूरत पड़ने पर निकले घर से
- गिरने की बजाय दिन प्रतिदिन चढ़ रहा जिले का पारा, चार दिन बाद और चढ़ेगा पारा
- सुबह से शाम तक सड़कों पर दिख रही वीरानी, कर्फ्यू जैसा नजारा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। तीखी धूप व गर्म हवा के थपेड़ों ने लोगों को परेशान कर दिया है। दिन का तापमान इतना तल्ख हो गया है कि सड़क पर निकलने से लोग हिचक रहे हैं। जिले में पारा 43 डिग्री पार कर चुका है। शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 43 व न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं 25 से 35 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गर्म हवा ने लोगों को दिन भर परेशान कर रही है। मौसम विभाग की मानें तो हवा के थपेड़ों से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन गर्मी अभी और सितम ढाएगी। बुधवार तक तापमान में एक प्रतिशत की गिरावट होगी, वहीं शुक्रवार से तापमान चढ़ेगा, जो शनिवार व रविवार को 43 डिग्री सेल्सियस के पार होगा।
गर्मी से जिलेवासियों का बुरा हाल है। एक सप्ताह से तेज धूप व दिन भर लू के थपेड़े चल रहे हैं। इसकी वजह से लोग परेशान रहे। हालांकि भारतीय मौसम विज्ञानी अतुल कुमार सिंह ने उम्मीद जताई है कि दो दिन बाद से पछुआ हवा की रफ्तार के कुछ कम होने के आसार हैं। तेज धूप की तल्खी जिले में जारी रहेगी। जिले के तीन दिन की राहत के बाद तापमान 43 के पार जाने की संभावना है।
न्यूनतम तापमान के भी 26 से 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे साफ जाहिर होता है कि अप्रैल में गर्मी व हीट वेव से राहत की उम्मीद नहीं। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के मुताबिक 15 दिनों तक लोगों को भीषण गर्मी व हीट वेव से राहत मिलने वाली नहीं है। हां तेज पछुआ हवा के थपेड़ों से दो से तीन दिन के अंदर राहत मिलने की उम्मीद है।
हीट वेव का असर, 11 बजे के बाद सड़कें हो जा रहीं वीरान
एक सप्ताह से तीखी धूप व पछुआ हवा के थपेड़ों से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सुबह सड़कों व प्रमुख बाजारों में भीड़ व भाड़ देखने को मिल रही है, लेकिन जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है सड़कों पर वीरानी छा जा रही है। शहर से लेकर सुदूर गांव देहात की सड़कें सूनी हो जा रही हैं। बाजारों में सन्नाटा पसर जा रहा है। जरूरी कार्य से ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं।
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रोजाना 200 से अधिक मरीज पहुंच रहे मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में
गमी के मौसम में मेडिकल काॅलेज में उपचार कराने आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। रोजाना ओपीडी में करीब 200 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें पेट दर्द, उल्टी व दस्त के मरीज शामिल हैं। हर मेडिकल कॉलेज में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही है। मेडिकल कॉलेज में पहुंचने के बाद भी मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों की समस्या कम नहीं हो रही है।
झुलस रही सब्जी व मक्के की फसल, किसान चिंतित
प्रचंड गर्मी का फसल पर असर पड़ रहा है। मक्का व सब्जी की फसल सूखने लगी है। गर्मी का प्रतिकूल प्रभाव कडू, नेनुआ, खीरा, करेला, बैंगन सहित अन्य सब्जियों पर पड़ रहा है। यदि गर्मी से राहत नहीं मिली तो इनके उत्पादन में भी कमी आएगी, कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक फल व सब्जियों को गर्मी से बचने के लिए समय समय पर सिंचाई करनी जरूरी है।
जिले के आठ दिन का तापमान
दिन का अधिकतम न्यूनतम
रविवार 42 26
सोमवार 42 26
मंगलवार 42 26
बुधवार 42 26
बृहस्पतिवार 43 27
शुक्रवार 43 28
शनिवार 44 28
रविवार 44 27
फसलों और पौधों को गर्मी से बचाव के लिए मिट्टी में नमी जरूरी : डॉ. मांधाता सिंह
फोटो- लू के थपेड़ों से बगीचे में गिरे आम के टिकोरे
संवाद न्यूज एजेंसी
भाटपाररानी। कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना के कृषि वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. मांधाता सिंह ने कहा कि कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और दिन में 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही पछुआ हवा से गर्मी का प्रभाव फसलों और पौधों पर तेजी से पड़ रहा है। इससे बचाव के लिए मिट्टी में नमी जरूरी है।
उन्होंने बताया है कि गर्मी का सीधा असर ग्रीष्मकालीन सब्जियों पर तथा मक्का, गन्ना, केला, पपीता आदि फसलों पर भी पड़ रहा है। आम के टिकोरे तेज पछुवा हवा और भीषण गर्मी से तेजी से गिर रहे हैं। इसका असर लीची पर भी पड़ रहा है। उन्होंने उनके पौधों की नर्सरी तथा पौधों में नमी बनाए रखने के लिए दो से तीन दिन पर सुबह और शाम के समय सिंचाई करने की सलाह दी है। ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे। दिन में सिंचाई न करें। आम के पौधों में भी सिंचाई बहुत जरूरी है। इस समय दवा कारगर नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि जब मिट्टी में नमी नहीं रहेगी तो फसलें मुरझा जाएंगी। मक्का के दाने पिचक जाएंगे और उत्पादन प्रभावित होगा। उन्होंने पशुपालकों को भी सलाह दी है कि लू से पशुओं को बचाने के लिए पानी में गुड़ घोलकर दोपहर के समय पिलाते रहें। ताकि पशुओं पर लू का असर न पड़े। किसान भी स्वास्थ्य के बचाव के लिए खेतों में दिन में न काम करें। बल्कि सुबह और शाम ही काम करें।
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हीट वेव से बचने के लिए क्या करें
- घर के बाहर निकलने के पहले भर पेट पानी अवश्य पियें।
- सूती, ढीले एवं आरामदायक कपड़े पहनें, धूप में निकलते समय सिर ढककर रखें, टोली, कपड़ा, छतर का उपयोग करें।
- पानी, छांछ, ओआरएस का घोल या घर बने पेय पदार्थ जैसे-लस्सी, नींबू पानी, आम का पन्ना इत्यादि का सेवन करें।
- भरपेट ताजा भोजन करके ही घर से निकलें, धूप में अधिक न निकलें।
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क्या न करें
-धूप में खाली पेट न निकलें। शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- मिर्च मसाले युक्त एवं बासी भोजन न करें।
- धूप में अधिक न निकलें, कूलर या एसी से धूप में एकदम न निकलें।
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लू के लक्षण
सिरदर्द, बुखार, उल्टी, अत्यधिक पसीना एवं बेहोशी आना, कमजोरी महसूस होना, शरीर में ऐंठन, नब्ज असामान्य होना।
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लू के लक्षण होने पर ध्यान रखें
- व्यक्ति को छायादार जगह पर लिटावें। व्यक्ति के कपड़े ढीले करें।
- उसे पेय पदार्थ कच्चे आम का पन्ना आदि पिलाएं।
- तापमान घटाने के लिए ठंडे पानी की पट्टियां रखें।
- प्रभावित व्यक्ति को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाकर डॉक्टरों से सलाह लें।
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स्पीकअप
गर्मी से जीना मुहाल हो गया है। दिन में किसी कार्यवश बाहर निकलने पर ऐसा लगा मानो शरीर जल रहा है। काफी तेज हवा चलने के बाद तीखी धूप से राहत नहीं है। समाज का हर तबका गर्मी से परेशान है।
-नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, चकियवा
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जिले में सुबह आठ बजे के बाद से ही हीट वेव का असर शुरू हो जा रहा है। सुबह दस बजते बजते धूप का प्रकोप इस कदर हो जा रहा है कि घर में पंखा व कूलर से हवा गर्म निकल रही है। बाहर की कौन कहे घर में ही उमस का अहसास हो रहा है।
-चंदा राव, न्यू काॅलोनी