फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Deoria News: बरहज में नहीं है बस अड्डा, सड़क पर बसों के खड़ा होने से लगता है जाम

Sun, 02 Apr 2023 11:32 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
विज्ञापन
बरहज में सड़क पर बसों के बेतरतीब खड़ा होने से लगा जाम और बस के इंतजार में दुकान के सामने बैठी छात
विज्ञापन
व्यापारिक स्थली है नगर, अभी तक किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं की पहल
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। नगरपालिका गौरा-बरहज में बस स्टेशन नहीं होने से सवारी भरने के लिए बसें सड़कों पर खड़ी होती हैं। इनके बेतरतीब खड़े होने से रोजाना लोग जाम के झाम से दो-चार होते हैं। आज तक किसी भी जिम्मेदार ने बस स्टेशन के लिए पहल नहीं की। बस स्टेशन कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं बन सका है। जिससे लोगों में मायूसी है।
नगर में जरूरत के सामानों की खरीदारी के लिए 15-20 किलोमीटर के गांवों के लोगों की आवाजाही होती है। जबकि तहसील, ब्लॉक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, थाना, स्कूल, रेलवे स्टेशन के अलावा अन्य संस्थान हैं। इससे नगर में रोजाना हजारों लोगों की भीड़ होती है। यहां से गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर बनारस और बलिया आदि जगहों के लिए बसों की आवाजाही होती है। आजादी के 75 वर्ष बाद आज भी बस स्टेशन का समुचित इंतजाम न होने के कारण सवारी के लिए सड़क पर बसें खड़ी होना मजबूरी है। सड़क पर बसों के बेतरतीब तरीके से खड़े होने के कारण नगर पालिका, मुख्य चौक मार्ग पर जाम लग जाता है। जिससे पैना, थाना मार्ग पर भी गाड़ियों की लंबी कतार लग जाती है। रोजाना सड़कों पर घंटों जाम लगा होने से राहगीर हांफते नजर आते हैं।
विज्ञापन


रेलवे यात्रा के लिए छोटी से बड़ी लाइन और बिजली से संचालित होने वाले ट्रेन का इंतजाम किया गया। लेकिन आज तक नगर में बस स्टेशन न बनने के कारण नगरपालिका मार्ग जाम हो जाता है। जिसके चलते बरहज की सभी प्रमुख सड़कों पर गाड़ियां रेंगती रहती हैं। बस स्टेशन के लिए किसी भी जनप्रतिनिधि ने आज तक सुधि नहीं ली है।
विज्ञापन

अरविंद रावत, व्यवसायी
एसके इंटर कालेज मैदान में पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के भाषण से विकास की कुछ उम्मीद जगी थी। लेकिन दूसरे कार्यकाल का एक वर्ष बीतने के बाद भी बरहज की स्थिति जस की तस बनी हुई है। बस स्टेशन न होने के कारण यात्रियों को बैठाने के लिए बसों को सड़कों पर खड़ा करना मजबूरी है। जबकि बसों के इंतजार में सड़क पर खड़ा होने पर छात्रों, महिलाओं और बच्चों को काफी दिक्कतें होती हैं।
उदयराज चौरसिया, अधिवक्ता
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें