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Deoria News: मेडिकल कॉलेज में वेंटीलेटर हैं पर सांसें देने में नाकाम

Fri, 18 Aug 2023 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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देवरिया। करीब दो साल पहले कोविड काल में मेडिकल कॉलेज में एल-टू हास्पिटल तैयार किया गया था। यहां गंभीर मरीजों के लिए 47 बेड का आईसीयू बनाया गया था। यहां 25 वेंटीलेटर, ऑक्सीजन यूनिट और माॅनीटर लगाए गए थे। इस पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए थे। कोरोना के मामलों में कमी आने के बाद से यह अस्पताल बंद है। इन उपकरणों का इस्तेमाल भी नहीं हो रहा है। ऐसे में इतने संसाधन उपलब्ध होने के बाद भी मेडिकल कॉलेज गंभीर रोगियों की सांसें देने से नाकाम साबित हो रहा है। हालत यह है कि मरीजों को मोटी रकम खर्च कर दूसरे शहर का सहारा लेना पड़ रहा है।
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महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में सस्ता और बेहतर इलाज का भरोसा लेकर आने वाले गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। पचास वेंटीलेटर आईसीयू न होने तथा बेहोशी के डॉक्टर, ट्रेंड स्टाफ व ऑपरेटर की कमी के कारण कारण बंद है। हालत यह है कि इनका उपयोग केवल मॉक ड्रिल तक ही सीमित है। शासन के निर्देश पर कई बार एमसीएच विंग में मॉक ड्रिल हो चुकी है। इसमें उपकरणों की सक्रियता भी परखी गई। लेकिन, वास्तविकता यह है कि तकनीकी कर्मचारियों की कमी को मेडिकल काॅलेज पूरा नहीं कर पा रहा है। इसके चलते लोगों को चौबीस घंटे में पांच हजार से दस हजार रुपये तक आईसीयू के लिए खर्च करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं गोरखपुर, लखनऊ सहित अन्य जगहों पर स्थित निजी अस्पतालों का लोगों को सहारा लेना पड़ रहा है।

आईटीआई निवासी वेद प्रकाश ने बताया कि पिता को आईसीयू में भर्ती करना था, लेकिन मेडिकल कॉलेज में सुविधा नहीं थी। इसे कारण शहर के एक निजी अस्पताल में दस हजार रुपये देकर भर्ती करना पड़ा। इसके बाद किसी तरह जान बची।
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बरहज निवासी अजय मिश्र ने बताया कि रिश्तेदार को अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगी। उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां पर ऑक्सीजन लेवल कम था। स्टाफ के लोगों ने सुझाव दिया कि इसे दूसरी जगह लेकर चले जाइए। यहां पर आईसीयू की व्यवस्था नहीं है। इसके कारण गोरखपुर ले जाकर भर्ती कराया और बीस हजार रुपये देना पड़ा।

आईसीयू की स्थापना के लिए प्रक्रिया की जा रही है। वहीं बेहोशी के डॉक्टर व अन्य स्टाफ के लिए शासन से मांग की गई है। आने वाले समय में यह सुविधा लोगों को उपलब्ध हो जाएगी। - डॉ. एचके मिश्रासीएमएस
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