‘करीब आओगे तो शायद हमें समझ लोगो, ये फासले तो गलतफहमियां बढ़ाते हैं’, अदबी मंचों से सुनी और सुनाई जाने वाली ये लाइनें नजरिया हैं कराची से देवरिया पहुंचे जमाल दंपति का, जिनके रिश्तों के धागे न सिर्फ हिंदुस्तान और पाकिस्तान के संबंधों को मजबूत डोर से बांधे रखने में बड़ा किरदार निभा रहे हैं बल्कि दोनों मुल्क के लोगों की नजदीकी बढ़ने की ख्वाहिश उनकी ख्वाहिशों की फेहरिस्त में सबसे ऊपर है। पत्नी शकीला जमाल को मायके वालों से मिलवाने लाए कराची के जमाल वहीद ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि भारत और पाकिस्तान का बुनियादी जुड़ाव इस तरह का है कि दोनों देशों के लोग कभी जेहनी तौर पर अलग नहीं हो सकते। दूरी और दोनों देशों की सियासत से जन्म लेने वाली सरहद की पाबंदियां बेवजह दूरी का अहसास कराती हैं, और दूरी गलतफहमी बढ़ाती है। इन्हीं पाबंदियों का नतीजा रहा कि शकीला के बहन तथा भाइयों के निकाह में नवंबर में देवरिया पहुंचने की ख्वाहिश वीजा की औपचारिकताओं में अटक कर रह गई और दिसंबर में आमद हो सकी। जमाल वहीद के साथ 1994 में शादी के वक्त देवरिया से रुखसत हुईं शकीला बताती हैं कि अक्ल, शक्ल, बोली और पहनावे में दोनों देशों के लोग एक जैसे हैं। आम पाकिस्तानी हिंदुस्तानियों से सीधे जुड़ाव के ख्वाहिशमंद रहते हैं लेकिन एक से दूसरे मुल्क के सफर की कानूनी बंदिशें आड़े आ जाती हैं। इसके चलते 10 साल बाद भारत आना हुआ है। 2005 से लेकर अब तक के वक्त में दिल्ली के हवाई अड्डे से लेकर देवरिया के अबूबकर नगर और भुजौली कॉलोनी तक पहुंच कुछ बदला लगा, नहीं बदले तो यहां रहने वाले लोग, जिन्होंने उसी अपनेपन से मुलाकात की, जैसे पहले मिलते थे।