पति ने दोनों बेटों को अपने पास रखकर महिला को घर से निकाल दिया। बाराबंकी जिले में रहने वाले अपने नाना के घर वह शरण लेने गई तो सिपाही ने उसकी लाचारी का फायदा उठाकर उसके साथ मनमानी की। गर्भवती होने पर पीड़ित दर-दर की ठोकरें खाती रही। टेंपो चालक की इंसानियत से समय से अस्पताल पहुंची और उसने बच्ची को जन्म दिया। पुलिस वालों ने उसे अल्पवास गृह पहुंचा दिया। शुक्रवार को पुलिस और अल्पवास गृह के लोगों से बातचीत में महिला का दर्द सामने आ गया। महिला ने बताया कि उसकी ससुराल लार इलाके के एक गांव में है। उसके माता-पिता की मौत बचपन में हो गई थी। चाचा-चाची ने परवरिश की। बाद में उसकी शादी कर दी गई। उसके दो बच्चे हुए। बड़ा बेटा छह और छोटा चार साल का है। पति ने दोनों बेटों को पास रखकर दस माह पहले उसे घर से निकाल दिया। वह आश्रय के लिए बाराबंकी जिले में रहने वाले नाना के पास जा रही थी। बाराबंकी पहुंचने पर एक सिपाही से अपना दुखड़ा सुनाया। सिपाही ने पहले सहानुभूति दिखाई, फिर मनमानी कर दी। वह गर्भवती हो गई और दर-दर भटकने लगी। भीख मांगकर किसी तरह पेट भरती रही। सड़क किराने पड़ी महिला को प्रसव पीड़ा होने पर टेंपो चालक श्रवण ने सीएचसी पहुंचाया। शुक्रवार को महिला को डिस्चार्ज कर दिया गया। सीएचसी के अधीक्षक डॉ. बीबी सिंह की सूचना पर नगर चौकी इंचार्ज सुदेश शर्मा अस्पताल पहुंचे। उनको देखकर महिला ने बच्ची का पिता एक सिपाही को बताया। पुलिस वालों ने उसकी मानसिक स्थिति ठीक न होने की बात कहकर उसकी आपबीती को अनसुना कर दिया। उसे अल्पवास गृह पहुंचाया। वहीं बच्ची को गोद लेने के लिए कई लाग अस्पताल पहुंच गए। अधीक्षक ने बच्ची देने से मना कर दिया। अल्पवास की संचालक गिरिजा त्रिपाठी ने बताया कि महिला की मानसिक हालत ठीक नहीं लग रही है, लेकिन उसने बातचीत में बताया है कि उसे पति ने घर से निकाल दिया था तो वह बाराबंकी अपने नाना के घर जा रही थी। बाराबंकी में किसी सिपाही ने उसके साथ जबरदस्ती की थी। मानसिक स्थिति में सुधार होने पर उसकी काउंसिलिंग की जाएगी। महिला के साथ यदि अन्याय की बात सामने आती है तो उसे न्याय दिलाया जाएगा। एसओ विकास यादव ने बताया कि महिला बाराबंकी में तैनात किसी सिपाही का नाम ले रही थी। उसकी मानसिक स्थित कमजोर है।