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बदहाली और दुर्गंध बनी प्रवीन के फरार होने में मददगार

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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के शौचालयों में दरवाजा ही नहीं। - फोटो : DEORIA
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बदहाली और दुर्गंध बनी प्रवीन के फरार होने में मददगार
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जिला अस्पताल के शौचालय में फाटक नहीं, खिड़कियां भी टूटीं
दुर्गंध के कारण दूर खड़े रहे बंदीरक्षक, मौका देख फरार हो गया प्रवीन
देवरिया। हत्या के आरोपी प्रवीन पाल उर्फ प्रदीप के फरार होने में वजह बंदीरक्षकों की लापरवाही तो थी ही, जिला अस्पताल की बदहाली भी कम मददगार नहीं थी। अस्पताल के शौचालय का हाल यह है कि वह जर्जर हो चुका है। उसमें फाटक तक नहीं है। जंग खा चुकी खिड़की की जाली एक झटके में टूट गई और आरोपी, खाकी की आंखों से ओझल हो गया।
उधर, शौचालय की नियमित साफ-सफाई नहीं होने से दुर्गंध असहनीय हो जाता है। तीमारदार भी मरीजों को शौचालय में भेजकर कहीं और चले जाते हैं। यही पर बंदी रक्षकों से चूक हो गई। वह उसे शौचालय में भेजकर दुर्गंध से बचने के लिए दूसरी ओर चले गए और आरोपी ने इसका फायदा उठा लिया।
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अयोध्या जनपद के इनायनत नगर थाना क्षेत्र के गहनो खिहारन बारून बाजार निवासी प्रवीन उर्फ प्रदीप पाल को 28 अक्तूबर को गिरफ्तार कर कुशीनगर जिले की पुलिस ने खूब वाहवाही लूटी थी। पुलिस टीम की सफलता को देखते हुए एसपी कुशीनगर ने 25 हजार रुपये का इनाम भी दिया था। पर खाकी की मेहतन पर दुर्व्यवस्था भारी पड़ गई। जिला अस्पताल का निरीक्षण आला अफसरों से लगायत प्रदेश के अधिकारी और मंत्री ने कई बार किया है। पर बिना फाटक वाले शौचलाय पर उनकी नजर नहीं पड़ी।
अस्पताल के तीनों शौचालय में फाटक नहीं है। अगर किसी महिला को जाना होता तो एक अलग से फाटकनुमा दरवाजे पर आड़ कर दिया जाता है। जब पुरूष को जाना होता है तो वहीं सिस्टम अपनाया जाता है। मंगलवार की रात में जब बिना फाटक वाले शौचालय में प्रवीन गया तो उसने बाहर वाले दरवाजे को थोड़ा सा जोड़ दिया। बंदीरक्षक तेज दुर्गंध के कारण कुछ दूर खड़े हो गए। इसका फायदा उठा कर वह फरार हो गया।
इससे पहले भी शौचालय से भाग चुका है एक बदमाश
देवरिया। जिला अस्पताल के शौचालय की खिड़की व जंगला तोड़ कर अभिरक्षा से फरार होने की घटना इससे पहले भी हो चुकी है। वर्ष 2013 में हत्यारोपी विवेका मिश्र जिला अस्पताल में भर्ती था। इसी दौरान शौचालय में गया और जंगला तोड़कर फरार हो गया। इतना जरूर है कि बाद में उसे एसओजी नेे गिरफ्तार कर लिया था।
...तो सुनियोजित तरीके से फरारी की बनी थी योजना
देवरिया। जेल में तीन दिन गुजारने के बाद ही प्रवीन ने फरार होने का खाका तैयार लिया। पुलिस को आशंका है कि साजिश के तहत अपने को बीमार होने का नाटक बना कर जिला अस्पताल पहुंच गया। जेल में मिलने के लिए उसे पिता भी गए थे और सौ रुपये देकर आए थे। पिता से मिले रुपये और अस्पताल पहुंचे परिचितों से उसकी बातचीत हुई थी।
पुलिस सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो 28 अक्तूबर की शाम को वह कारागार में दाखिल हुआ था। 31 अक्तूबर की शाम को तबीयत खराब होने पर जिला अस्पताल में बंदीरक्षकों ने भर्ती कराया था। पुलिस की जांच में पता चला है कि पिता ने मिलने के दौरान उसको सौ रुपये दिए थे। मेडिकल वार्ड में भर्ती होने के दौरान एक नवंबर को उससे मिलने दो लोग आए थे। फरारी के करीब एक घंटा पहले दाढ़ी रखा एक युुवक उससे मिलने के लिए आया था। पुलिस को आशंका है कि उस व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध हो सकती है, क्योंकि उसके मिलने के बाद ही वह फरार हो गया।
मुकदमा दर्ज, दो बंदी रक्षक निलंबित
देवरिया। जिला अस्पताल से फरार हुए प्रवीन के मामले में बंदी रक्षक की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। जबकि लापरवाही बरतने वाले दो बंदी रक्षकों को निलंबित कर दिया गया है।
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पुलिस अभिरक्षा से फरार हत्यारोपी के मामले में मुकदमा दर्ज कर कोतवाली पुलिस ने तलाश शुरू कर दी है। इस मामले में बंदी रक्षक वृद्धिचंद की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया। मुकदमा दर्ज होने के चौबीस घंटे बाद भी पुलिस अभी फरार आरोपी की परछाई तक नहीं छू पाई है। जबकि दूसरी तरफ कारागार के अधीक्षक बीएन मिश्र ने बताया कि बंदी रक्षक वृद्धिचंद और हीरा लाल की लापरवाही सामने आने पर उनको निलंबित कर दिया गया है। मामले की विभागीय जांच की जा रही है।
फरार आरोपी के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम लगाई है। अभी उसके बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है।
-संकल्प शर्मा, एसपी
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