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Deoria News: रेलवे स्टेशनों के आसपास फैला है ई-टिकट के धंधेबाजों का जाल

Thu, 17 Oct 2024 02:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
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देवरिया/भटनी। दीपावली और छठ त्योहार पास आते ही ई-टिकट के धंधेबाज सक्रिय हो गए हैं। वह जिले के सभी रेलवे स्टेशनों के आसपास अपना नेटवर्क मजबूत कर टिकट की जालसाजी करने में जुट गए है। हालांकि सीआईबी और आरपीएफ समय-समय पर कार्रवाई कर उनके रैकेट को तोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन रेलवे में अंदर तक पैठ होने के चलते वह अपने आप को पुनः खड़ा करने में सफल हो जा रहे है। तत्काल टिकट रेलवे काउंटर से पहले कन्फर्म पा जाते हैं, माफिक दाम में लोगों को बेच अधिक मुनाफा कमाते हैं।
दशहरा के बाद दीपावली व छठ त्योहार को लेकर मुंबई, दिल्ली, गुजरात, पंजाब आदि बड़े शहरों से लोग अपने घरों को आने को तैयारी कर रहे है।उन्हें दीपाली, छठ व नवम्बर महीने में होने वाली शादी समारोह में रेल टिकट अधिक दाम में बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाने की चाहत है।
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इसके लिए वह रेलवे स्टेशन के आसपास अपने आदमी लगा रखे हैं। इससे उनको रेल काउंटर पर खड़े मालदार ग्राहक और रेलवे स्टेशन पर मौजूद सीआईबी और आरपीएफ का लोकेशन आसानी से मिल जा रहा है। हालांकि सीआईबी व आरपीएफ की संयुक्त टीम देवरिया सदर, भटनी, सलेमपुर, लार रोड, बरहज, भाटपाररानी व बनकटा रेलवे स्टेशन के आसपास के चौक चौराहों पर कार्रवाई इनके कमर को तोड़ने का काम कर रही है। बावजूद उनकी गहरी पैठ से वह इस कारोबार को दोबारा तेजी से खड़ा कर ले रहे है।
टिकट धंधेबाज नित नए तरकीब, बड़े शहरों तक फैले नेटवर्क व विकसित सॉफ्टवेयर से रेलवे से पहले लोगों को कन्फर्म तत्काल टिकट ज्यादे रुपये लेकर आसानी से दे रहे है। परेशान लोग ट्रेन में घंटों धक्का खाने से बचने के लिए धंधेबाजों के पास जाना सबसे उचित समझ रहे है।
बड़े शहरों से मैनेज होता है खेल : देवरिया। ई-टिकट का धंधा करने वाले मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता आदि बड़े शहरों में बैठ कर अपने लोगों के माध्यम बड़े आसानी से इस धंधे में जान फूंक रहे हैं। वह रेल अधिकारियों से मिलकर पहले दोस्ती करते हैं, फिर जरूरत पड़ने पर उनकी मदद से टिकट के धंधे को अंजाम देते है। भटनी सीआईबी प्रभारी अरविंद कुमार यादव ने बताया कि टिकट जालसाजों के पास अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर है व यूजर आईडी है। इससे वह रेल खिड़की से जल्दी लोगों को तत्काल टिकट दे देते हैं। वह प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर व यूजर आईडी का भी धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे है।
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गर्मियों व दिवाली के आसपास इनका गैंग तेजी से सक्रिय हो जाता है। इनको पकड़ने के लिए हमें भी इनके जैसे सोच रखनी पड़ती है तब जाकर कामयाबी मिलती है। बनकटा में कार्रवाई के बाद कुछ लोगों का नाम सामने आया है।
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