भाटपाररानी। नया भारत, समर्थ, सशक्त और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में यह आवश्यक है की मातृभाषा, शिक्षा एवं संस्कार का माध्यम बने।
ये बातें कस्बा के मदन मोहन मालवीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सभागार में आयोजित शिक्षा व संस्कृति उत्थान न्यास गोरक्ष प्रांत के तत्वाधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा मातृभाषा उन्नयन विषयक शैक्षिक संगोष्ठी में प्राचार्य एससी गौड़ ने कहीं। हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रणजीत सिंह ने हिंदी भाषा के इतिहास पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए आधुनिक समय में इसकी उपयुक्तता तथा समावेशी स्वभाव पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. दिनेश शर्मा ने भारतीय राष्ट्रवाद के उभार में हिंदी की भूमिका पर चर्चा की। डॉ. महेंद्र कुमार मिश्र ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उल्लिखित मातृभाषा में शिक्षा की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। कहा कि जब तक मातृभाषा में शब्दानुवाद की जगह भावानुवाद नहीं होगा, तब तक मातृभाषा में शिक्षण सफल नहीं होगा। संगोष्ठी को जय सिंह यादव, पूर्व प्राचार्य प्रो. राकेश कुमार, डॉ. श्रीनिवास मिश्रा, डाॅ. मनीष त्रिपाठी, डॉ. अमीर लाल, सुधीर शुक्ला आदि ने संबोधित किया।