जमुआ नंबर दो के सात आराजी संख्या में अब बैनामा करने में आएगा पेंच
- जमुआ नंबर दो के सात आराजी संख्या पर शत्रु संपत्ति का होगा नाम
- सातों आराजी संख्या पर अगर हो गया बैनामा तो नहीं होगा खारिज दाखिल
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। जमुआ नंबर दो के रहने वाले नजीर के दो एकड़ जमीन पर बैनामा लेने वालों का नाम खारिज होकर शत्रु संपत्ति का नाम चढ़ेगा। अब इन नंबरों में कोई बैनामा लिया तो उसका खारिज दाखिल रुक सकता है। प्रशासन ने नजीर के सात नंबरों की भूमि को चिह्नित कर लिया है।
तहसील क्षेत्र के जमुआ नंबर दो गांव के रहने वाले नजीर भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के समय पाकिस्तान में बस गए। उसके बाद उनकी संपत्ति पर उनका ही नाम चला आ रहा था। सुप्रीम कोर्ट के 4 अप्रैल 1988 के फैसले के मुताबिक यह जमीन शत्रु संपत्ति यानी भारत सरकार के होने का आदेश हुआ। पूरे देश में इसका पालन हुआ लेकिन जमुआ में इसका तक पालन नहीं हुआ। नजीर की रकबा 54‚ 88,105 मिजुलमा, 107, 170, 202 मिजुलमा, 209 मिजुलमा पर कुछ लोग अपना नाम चढ़वा कर उसे बेच दिया। करीब 50 से अधिक लोगों को यह जमीन बेची गई है। जिला प्रशासन को इसकी भनक लगी तो त्रिस्तरीय टीम गठित कर एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने तहसीलदार अलका सिंह हल्का लेखपाल रजनीश मिश्र के साथ पहुंची और मौके की स्थिति देखी। मामला सही पाया गया। इस पर टीम ने अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी। तहसीलदार अलका सिंह ने कहा कि यह भूमि भारत सरकार की है। इस पर यदि कोई बैनामा लेता है, तो उसका किसी भी हाल में नाम नहीं चढे़गा। इन सात नंबरों में जिसका भी नाम आता है तो वह नाम निरस्त कर शत्रु संपत्ति घोषित कर भारत सरकार का नाम चढ़ाया जाएगा।