पृथ्वी पर जब-जब धर्म की हानि होती है और पाप बढ़ता है तो धर्म की रक्षा के लिए प्रभु अवतार लेते हैं। अयोध्या से पधारीं मानस कोकिला प्रीति उपाध्याय ने कथा के दौरान ये बात कही। वह कटइलवा स्थित सोनवें मंदिर पर चल रहे शिवशक्ति महायज्ञ में श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करा रही थीं। उन्होंने कहा कि राम की कृपा से अधर्मी भी धर्म की राह पकड़ लेते हैं। जैसे डाकू रत्नाकर संतों के सानिध्य में आने पर राम नाम का जप करने मात्र से बाल्मिकी बन गया। मनुष्य को सदैव सदगुण कर्म करना चाहिए। कर्म करने वाले हर एक व्यक्ति को उसका फल परमात्मा देता है। पृथ्वी दुखालय है। सुखालय तो परमात्मा के चरणों में है। अच्छे कर्मों से ही प्राणी सद्गति को प्राप्त होता है। रावण के अत्याचार से व्याकुल पृथ्वी की पुकार पर भगवान ने अयोध्या में जन्म लेकर दुष्टों का संहार कर भक्तों की रक्षा की थी।