समुद्र की गहराई समझाने वाली पढ़ाई के इरादे से चेन्नई का रुख करने वाले अबुबकर नगर निवासी वासिल सिद्दीकी को यह उम्मीद नहीं थी कि पढ़ाई पूरी होने से पहले उसे पानी से आई तबाही का सामना करना पड़ेगा। चेन्नई में आफत की बरसात में घिरे वासिल ने जब से फोन कॉल और व्हाट्सअप संदेश के जरिए घर वालों को हालात बताए हैं, तबसे उनकी आंखों के पानी का बहाव भी नहीं थम रहा है।चेन्नई में हालात बिगड़ने की खबर ने ही अब्बू जहांगीर आलम को बेचैन कर दिया था। अम्मी शकीला खातून ने जाना तो खाना-पीना छोड़कर उसकी हिफाजत की दुआओं में लग गईं। घर वालों की बेचैनी उस वक्त थोड़ा कम हुई जब बृहस्पतिवार की शाम अब्बू जहांगीर आलम के पास वासिल का फोन आया। कॉल ने उसके खैरियत से होने की तस्दीक तो की लेकिन यह भी साफ किया कि चार दिसंबर को राप्ती सागर एक्सप्रेस से घर वापसी का उसका पहले से बना टिकट अब कामयाब नहीं होगा। पल्लावरम में स्कूल ऑफ मैरीटाइम के हॉस्टल के चारों ओर सैलाब जैसा माहौल होने से निकल पाना नामुमकिन बताया। पांच तारीख का चेन्नई से नई दिल्ली के लिए गरीब रथ का टिकट करने की सलाह घर वालों को दी। साथ ही बोला, मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के पहले साल में ही जिस तरह पानी की तबाही का सामना करना पड़ रहा है, उससे अभी तो सुरक्षित घर पहुंचना भी आसान नहीं लग रहा। बात पूरी होने से पहले ही वासिल का फोन कट गया। इसके बाद से घर वाले कोशिश के बाद भी फोन पर बात नहीं कर पा रहे हैं। बेचैनी की स्थिति में उसकी खैरियत और सलामती से घर लौटने की दुआएं की जा रही हैं। ऐसी ही दुआ घर पर छोटे भाई बहनों को ट्यूशन पढ़ाने वाले आशुतोष कर रहे हैं तो वासिल के दोस्त जफर खान भी।