200 मीटर की जगह 150 मीटर ही हुआ है बोल्डर पिचिंग कार्य
ईश्वरपुरा गांव के निकट अधूरा है बोल्डर पिचिंग, एसडीओ ने कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई करने का दिया निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर/एकौना। जर्जर बंधों को दुरुस्त कराने का दावा ठोक रहे प्रशासन की पोल जमीनी हकीकत बयां कर रही है। पचलड़ी-पलिया बांध का काम खस्ताहाल में छोड़कर ठेकेदार तीन माह से फरार है। यहां करीब दस करोड़ की लागत से बोल्डर पिचिंग का कार्य चल रहा था। दो सौ मीटर की जगह 150 मीटर बोल्डर पिचिंग होने के बाद काम ठप पड़ा है। गोर्रा नदी के बढ़ते जलस्तर को देख दोआबा के लोगों को बांध कटने की चिंता सता रही है। नदी बंधे से सटकर बह रही है। बुधवार को नरायनपुर-नगवा मार्ग पर निर्माणाधीन कटारी नाला के पास ई-रिक्शा पलट गया। रास्ते पर कीचड़ी लगने से आवागमन प्रभावित है।
गोर्रा नदी स्थित पचलड़ी-पलिया बांध पर ईश्वरपुरा गांव के पास सिंचाई विभाग की ओर से कटान स्थल पर बोल्डर पिचिंग का कार्य एक साल पहले शुरु हुआ। यहां दो सौ मीटर नदी के तलहटी से बंधे तक अपरन पिचिंग का कार्य कर बोल्डर बिछाना था। कार्यदायी संस्था को छह माह के भीतर कार्य कराने का निर्देश दिया गया था। ग्रामीणों के अनुसार बोल्डर पिचिंग में भारी अनियमितता की गई। ठेकेदार ने बोल्डर को नदी की सतह से नहीं बिछाया है। अब अधूरा कार्य छोड़कर कार्यदायी संस्था गायब है। वहीं हर दिन बढ़ रहे गोर्रा के जलस्तर को देख बांध पर खतरा बढ़ गया है। नदी बंधे पर सीधे ठोकर मार रही है। राप्ती किनारे तिघरा-मराछी बांध पर भेड़ी गांव के पास कटान बढ़ रहा है। बंधों की जर्जर स्थिति से हालत चिंताजनक बनी है। सिंचाई विभाग के एसडीओ संजय सिंह ने कहा कि बंधें पर ठेकेदार द्वारा काम छोड़कर फरार होने की सूचना मिली है। कार्यदायी संस्था के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बंधे पर कटान को ठीक करने का काम चल रहा है।
बोले ग्रामीण
ईश्वरपुरा के ग्राम प्रधान अनिरुद्ध चौधरी ने कहा कि पचलड़ी से पलिया तक बंधे की हालत खस्ताहाल है। कटान स्थल पर बोल्डर पिचिंग का काम अधूरा होने से ईश्वरपुरा गांव के पास खतरा बढ़ गया है, गोर्रा नदी का जलस्तर बढ़ा, तो दोआबा में भारी नुकसान होगा।
-अब्दुल्लाह खान ने कहा कि बंधे की दुर्दशा को लेकर कई वर्षो से संघर्ष किया जा रहा था, काम भी शुरु हुआ तो ठेकेदार कार्य ठप कर फरार हो गया। अधूरे काम से ग्रामीणों में चिंता बनी है। जिले के अधिकारियों को जांच कर उचित करनी चाहिए। बंधे के कटान स्थलों पर कार्य संतोषजनक नहीं है।