नंदना वार्ड पश्चिमी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में रविवार की सुबह कथा वाचक डॉ. हरिनारायण मिश्र ने कहा कि अहंकार ही जीव के जीवन का पतन मार्ग है। जो शरीर के भीतर सभी गुणों को एक साथ नष्ट कर देता है। क्योंकि अभिमान इंद्र जैसे देवता का भी चूर हो गया। अहंकार नष्ट करने के लिए सतसंग, साधना और भगवत प्राप्ति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ब्रह्म चिंतन करने वाला जीव, ब्रह्म ही होता है। व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने भीतर व्याप्त अविद्या, लज्जा व अहंकार का नाश करते हुए परमानंद को प्राप्त करे। कथा अवसर पर आचार्य अभय मिश्र, विंदा देवी, अशोक तिवारी, संजय तिवारी, पारस मिश्र, कंचन तिवारी, अमता तिवारी, पारसनाथ पांडेय, द्वारिकानाथ पांडेय, प्रेमशंकर तिवारी आदि उपस्थित रहे।