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Deoria News: रामबन गमन की लीला देख भावुक हो गए दर्शक

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राम -केवट संवाद ने दर्शकों का मन मोहा
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-नर्मदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रहे शिव शक्ति महायज्ञ में दूसरे दिन की रामलीला

संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेदीपट्टी नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में चल रहे शिव शक्ति महायज्ञ में सांस्कृतिक संगम सलेमपुर के कलाकारों ने भगवान राम के वनगमन की लीला का मंचन किया, जिसे देख दर्शक भावविभोर हो गए। कैकई के दो वचन मांगते ही दर्शकों में सन्नाटा छा गया, सभी कैकई का रोल करने वाली कलाकार को कोसने लगे।
रामलीला के दूसरे दिन राम के राज्याभिषेक की तैयारी जोरों पर चल रही थी। चारों तरफ खुशियां मनाई जा रही थीं। इसी समय कैकई की दासी मंथरा पहुंच कर कहने लगी कि बताइए रानी आपके पुत्र भरत के बजाय राजा राम बन रहे हैं। इसी बात को इतना भड़काने लगी कि रानी ने राजा दशरथ को बुलाकर अपने दो वचन मांग लिए। पहला भरत को राज गद्दी और राम को 14 वर्ष का वनवास।
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यह वचन सुनते ही राजा दशरथ चीख-चीख कर रोने लगे। रानी ने राजा की एक न सुनी और अपने वचन पर कायम रही। सुबह होते ही पूरे अयोध्या में खुशी के जगह मायूसी छा गई। जहां राम को गद्दी मिलनी थी, वहीं उन्हें बनवास जाना पड़ा। रामलीला में निषाद राज मिलन के मंचन में राम-केवट संवाद देख कर दर्शक भाव विह्वल हो गए।
इसके पहले रामलीला की शुरुआत कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने रामजी की आरती से की। उन्होंने मेदीपट्टी गांव में समाजसेवी सुरेंद्र लाल श्रीवास्तव की तरफ से कराए गए इंटर लाकिंग सड़क का लोकार्पण किया। सुरेंद्र श्रीवास्तव ने कृषि मंत्री को अंगवस्त्र और स्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया। इस दौरान देवेंद्र लाल श्रीवास्तव, प्रमोद चौबे, प्रभुनाथ तिवारी, उग्रसेन दुबे, राजन श्रीवासत्व, मंटू राय आदि मौजूद रहे।
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श्रीकृष्ण जन्म पर भगवान शिव स्वयं कृष्ण को देखने गोकुल आए



देवरिया। मेदीपट्टी में हुई कथा में श्याम सुंदर पाराशर ने प्रवचन दिया कि गोकुल में नंद और यशोदा के घर स्वयं भगवान शिव श्रीकृष्ण को देखने आए। सभी लोग शिव के रूप को देखकर भयभीत थे, क्योंकि अभी हाल ही में ही पूतना के कृत से गोकुल धाम भयभीत था। कथा को पराशर ने संगीत के माध्यम से गाकर भक्तों का मन मोह लिया।
उन्होंने गीत गाया कि मईया मोरे तोरे द्वारे बाला योगी आए। पराशर ने कहा कि भगवान शिव अपनी गोद में श्रीकृष्ण को लेकर मग्न हो गए और कुछ समय के लिए समाधि लगा ली। उनके गले में सर्प, बिच्छू सब श्रीकृष्ण का स्पर्श कर धन्य हो गए, जब भगवान शिव ने उनको गोद में लिया। बड़ा ही सुंदर बज्र भाषा और मृदुल शब्दों में संगीत से पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं को नाचने पर मजबूर कर दिया। कहा कि फिर शिव शंकर भगवान ने अपने अघोरी रूप में युग-युग जीने का आशीर्वाद नंद लाला को दिया।


इससे पहले विधायक देवरिया सदर डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी, नर्मदेश्वर महादेव मंदिर के अध्यक्ष व यजमान सुरेंद्र लाल श्रीवास्तव, देवेंद्र लाल श्रीवास्तव, अतुल कुमार श्रीवास्तव, आचार्य राजू मिश्र, आचार्य परमेश मिश्र, महामंडलेश्वर सोमेश्वर यतिजी महाराज, पूर्व प्रधानाचार्य मधुसूदन मणि त्रिपाठी, प्रभुनाथ तिवारी, सुभाष तिवारी, राजेंद्र राय, विशाल श्रीवास्तव,उपेंद्र लाल श्रीवास्तव, आलोक राय, टुनटुन बाबा आदि ने आरती की।


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भक्ति से भगवान को प्राप्त किया जा सकता : पाराशर

नर्मदेश्वर महादेव मन्दिर परिसर में श्रीमद भागवत कथा का तीसरा दिन
देवरिया। भगवान कृष्ण के जन्म के उत्सव के बाद ही उन पर मृत्यु का साया मंडराने लगा। मथुरा का राजा अत्याचारी कंस उनके पीछे पड़ा था। इस तरह जन्म के ठीक छह दिन के भीतर भगवान को मारने के लिए कंस की ओर से राक्षसी पूतना भेजी गई।
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उसकी साजिश थी कि वह अपने स्तन पर विष लगाकर जाएगी और धोखे से नन्हें बालक को पिला देगी। इस तरह कंस के रास्ते का कांटा मिट जाएगा, लेकिन पूतना मारी गई। नवजात शिशु बने भगवान कृष्ण ने पूतना का दूध पीकर उसके प्राण पी लिए और वह मारी गई। इस तरह भगवान ने पूतना का उद्धार कर दिया। संवाद
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