मरीजों को करीब पंद्रह दिन से नहीं मिल रही दवा
प्रारंभिक टीबी की थ्री-एफडीसी व फोर-एफडीसी दवा हो चुकी है समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। क्षय रोग के मरीजों को दी जाने वाली दवा की कमी है। प्रारंभिक टीबी मरीजों की दवाएं समाप्त हो गई हैं। मरीजों को समय से दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। चार माह से दवा की कमी चल रही है। पंद्रह दिन से खत्म हो गई है। चिह्नित करीब 3150 नए मरीज जिनकी दवा चल रही है। उनके मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ गया है।
जिले में क्षय रोगियों को चिह्नित कर इलाज किया जा रहा है। इन मरीजों के लिए स्टेट ड्रग स्टोर से वाराणसी से दवा उपलब्ध कराई जाती है। इन दिनों आपूर्ति न होने से दवा का संकट खड़ा हो गया है। टीबी क्लीनिक और सीएचसी मेें थ्री एफडीसी और फोर एफडीसी दवाएं समाप्त हैं। इसके अलावा इथेपबुटाल भी नहीं है। मरीज दवाओं का सेवन नहीं कर पा रहे हैं। नियमित दवा न लेने से शरीर में बैक्टीरिया का लोड बढ़ जाता है। कुछ दिन बाद वह दवा खाने से असर नहीं करती है। इसके कारण मरीज एमडीआर टीबी की श्रेणी में चला जाता है। यह जटिल टीबी मानी जाती है। अधिकांश मरीजों में इसकी आशंका व्यक्त की जा रही है। मांग के सापेक्ष आपूर्ति नहीं होने से दवा की किल्लत हुई है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रंजीत कुशवाहा ने बताया कि टीबी मरीजों को चिह्नित कर इलाज किया जा रहा है। दवा की कमी है। इसके लिए मांग की गई है। जिन मरीजों की दवा चल रही है। मरीजों को दो किस्त में तीन हजार रुपये दिए जाते हैं। पहली बार 1500 रुपये दिए जाते हैं। जो लोग सक्षम हैं, वे बाजार से दवा ले सकते हैं और आने पर पूरे कोर्स की दवा उपलब्ध कराई जाएगी। बताया कि जिन मरीजों का गैप हुआ है, उनके इलाज का समय बढ़ा दिया जाएगा। हालांकि, जल्द दवा उपलब्ध हो जाएगी।
अस्पताल से मायूस लौट रहे टीबी मरीज
जिले में सोलह टीबी यूनिट स्थापित की गई हैं। यहां से चिह्नित मरीजों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह सुविधा देवरिया सदर और बरहज में दो-दो स्थानों पर है। टीबी यूनिट बनकटा में 159, बरहज में 131, बतरौली में 89, भलुअनी में 147, भटनी में 141, भाटपाररानी में 217, टीबी क्लीनिक में 190, गौरीबाजार में 489, लार में 355, महेन में 45, महुआडीह में 159, परसिया चंदौर में 137, पथरदेवा में 211, पिपरा दौला कदम में 84, रुद्रपुर में 284, सलेमपुर में 232, सिधुवा में 185 व तरकुलवा केंद्र में 163 मरीज चिह्नित हैं। इन्हें इन केंद्रों से दवा दी जाती है। लेकिन, हर जगह दवा नहीं है। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने दवा खरीदने के निर्देश दिए हैं पर वह दवा भी कुछ ही दिन चलेगी।
दवा छूटने पर बढ़ सकते हैं एमडीआर के मरीज
टीबी के मरीज को नियमित, समय से वजन के अनुसार दवा लेनी चाहिए। दवा छोड़ना और दो से तीन दिन खाने में गैप करने पर दिक्कत बढ़ती है। दवा शुरू करने पर वह दवा काम नहीं करती है, और मरीज एमडीआर मरीज की श्रेणी में जा सकता है। इस श्रेणी के मरीजों के थूकने, खांसने, छींकने से स्वस्थ व्यक्ति में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।
कोट
क्षय रोगियों की थ्री-एफडीसी और फोर-एफडीसी की दवा की कमी है। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने खरीदारी करने का आदेश दिया है। दवा की खरीदारी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द दवाएं उपलब्ध हो जाएंगी।
-डॉ. राजेश झा, सीएमओ