- परिजनों ने इमरजेंसी पर तैनात डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही से मौत की कही बात
- परिजनों का आरोप, असहनीय पेट होने के बाद नहीं लगाया इंजेक्शन, न ही ऑक्सीजन
- पर्ची कटवा कर लाने की स्वास्थ्यकर्मी ने कही बात, तब तक छात्र की हो गई मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया/ बरियारपुर। बरियारपुर थाना क्षेत्र के बैकुंठपुर निवासी एक छात्र मंगलवार सुबह पेट दर्द से तड़पने लगा। यह देख परिजन बेचैन हो उठे। उसे लेकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पर पहुंचे। जहां उसे भर्ती करने की बजाय, स्वास्थ्य कर्मियों ने परिजनों से पर्ची कटवाकर लाने की बात कही। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने दर्द का न तो इंजेक्शन दिया और न ही ऑक्सीजन लगाया। इसके चलते उसकी मौत हो गई।
डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के चलते उसकी मौत हुई है। इमरजेंसी पर परिजनों ने डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों को जमकर खरी खोटी सुनाई। सूचना पर पहुंचे रेलवे चौकी इंचार्ज के समझाने व बुझाने के बाद परिजन शव लेकर घर चले आए। गांव पहुंच बैकुंठपुर घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
बैकुंठपुर गांव निवासी आदर्श जायसवाल (18) पुत्र स्व. हेमचंद जायसवाल मंगलवार की सुबह सोकर उठा। उठने के थोड़ी देर बाद उसके पेट में दर्द महसूस हुआ। थोड़ी ही देर में वह दर्द असहनीय हो गया, जिससे वह बेचैन हो गया और तड़पने लगा। यह देख परिजन परेशान हो गए। उसके दर्द को देख परिजनों को कुछ सूझ नहीं रहा था। परिजन आनन-फानन उसे लेकर सीधे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पर पहुंचे। जहां किसी डॉक्टर व कर्मी ने इलाज नहीं शुरू किया। परिजनों के पूछने पर पर्ची लेकर आने की बात कही। इसके बाद परिजन पर्ची लाने चले गए। इसी बीच आदर्श ने दर्द से तड़पते हुए दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजन उग्र हो गए।
परिजनों से स्वास्थ्य कर्मियों ने शव को ले जाने की बात कही तो वे आक्रोशित हो गए। परिजन इमरजेंसी के बाहर आए और हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने इमरजेंसी गेट पर खड़े होकर डॉक्टर व कर्मियों को खूब खरी खोटी सुनाई। मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई करने की मांग की। सूचना पर पहुंचे रेलवे चौकी इंचार्ज संजय सिंह चंदेल ने आक्रोशितों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद परिजन आदर्श के शव को लेकर गांव चले गए। जहां बैकुंठपुर घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। घटना के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वह इंटर का छात्र था।
चचेरे भाई ने रोते हुए किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाने की कह रहा था बात
चचेरे भाई आदर्श की सूचना पर पहुंचा एमआर भाई सचिन जायसवाल परिजन के पास पहुंचते ही रोने लगा। उसने परिजन से घटना की जानकारी ली। इसके बाद उन्हें यहां क्यों लाने की बात कही। उसने कहा कि सरकारी अस्पताल की व्यवस्था से आप भलीभांति परिचित है। देवरिया में और कोई अस्पताल नहीं था। इतने सारे प्राइवेट नर्सिंग होम है आप वहां लेकर क्यों नहीं गए। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने उसे संभालते हुए शांत कराया।
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कोट
मामला संज्ञान में है। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बताया कि मरीज के आने पर उसे तुरंत इलाज मुहैया कराने की प्रक्रिया चल रही थी। डॉक्टर के अनुसार मरीज गंभीरावस्था में बाहर से इलाज कराने के उपरांत लाया गया था। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। उसके इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।
-एचके मिश्रा, सीएमएस