हड़ताल से नगर के तीन मोहल्लों 440 गांवों की 16 घंटे ठप रही बिजली, मच्छरों ने रातभर किया परेशान, अंधेरे में गुजरी रात
क्षेत्रों में कई जगह पानी के लिए लोगों ने हैंडपंप का सहारा लिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बिजली निगम के अभियंताओं और तकनीकी कर्मचारियों की बृहस्पतिवार सुबह दस बजे से 72 घंटे की हड़ताल के कारण करीब 46 फीडर ठप रहे। शहर के तीन मोहल्लों सहित जिले के 440 गांवों के 1.60 लाख उपभोक्ताओं को करीब 16 घंटे तक बिजली नहीं मिली। उपभोक्ताओं ने पूरी रात अंधेरे में गुजारी। गर्मी के कारण मच्छरों के प्रकोप के चलते रातभर लोग पूरी नींद नहीं ले पाएं। कुछ जगहों पर लोगों को पानी के लिए हैंडपंप का सहारा लेना पड़ा। जबकि दूसरी तरफ फाल्ट होने पर उपभोक्ता उपकेंद्रों का चक्कर भी लगाते रहे, लेकिन इन कोई सुनने वाला नहीं था।
शहर के लगड़ी खास में रात के करीब 12 बजे हाईटेंशन के तार में फाल्ट होने से उमानगर, देवरिया रामनाथ, सीसी रोड की बिजली सुबह छह बजे तक कटी रही। मोहल्ले के लोगों ने किसी तरह सात बजे ठीक कराया तो फिर से दोपहर में उसी जगह फाल्ट हो गया। इस कारण फिर तीन घंटे के लिए बिजली कटी रही। पुरवा के बिजली उपकेंद्र से जुडे सिंधी मिल, राम गुलाम टोला सहित करीब 80 गांवों की बिजली शनिवार रात में एक बजे से रविवार सुबह दस बजे तक गायब रही। इंनकमिंग में गड़बड़ी ठीक होने के बाद आपूर्ति बहाल की गई। सुबह छह बजे से भटवलिया उपकेंद्र के कचहरी फीडर में गड़बड़ी आने से सिविल लाइंस, राघव नगर में बिजली छह घंटे तक कटी रही। सबसे अधिक प्रभावित सलेमपुर उपकेंद्र रहा। इससे जुड़े करीब 25 फीडर में तकनीकी खराबी आई। इससे 150 गांवों की बिजली रात में करीब एक बजे सुबह नौ बजे तक गायब रही। खुखुंदू उपकेंद्र से जुड़े 102 गांवों की बिजली सुबह छह बजे से लगायत 12 बजे तक प्रभावित रही। तरकुलवा के 72 गांवों में शनिवार रात में बिजली नौ बजे से ही कटी रही। इस क्षेत्र से जुड़े गांवों के लोगों को परेशान होना पड़ा।
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तीसरे दिन भी ठप रही आपूर्ति
भाटपारानी। भाटपाररानी तहसील क्षेत्र के ग्रामीण बिजली उपकेंद्र भिंगारी बाजार और गजहरवा अंतर्गत आने वाले दो सौ गांवों में तीसरे दिन रविवार को भी बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप रही। बनकटिया दुबे बिजली उप केंद्र पर दिन में 10:30 बजे आपूर्ति बहाल कर दी गई। जिससे सोहनपुर बाजार, कारेकट, पचरखिया, रामपुर बुजुर्ग, जंजीरहा, प्रताप छापर, छेरिया, ऐंठी, अवगा सहित दर्जनों गांव के लोगों ने राहत की सांस महसूस की। वहीं भिंगारी बाजार और गजहरवा बिजली उपकेंद्र पर बिजली आपूर्ति अभी भी बहाल नही हो पाई है। इससे भिंगारी बाजार ,सरया, निशनिया, पैकौली, बिरमापट्टी, परोहा, पिपरा बघेल, छपिया, चकिया कोठी, भोपतपुरा, भवानी छापर ,राजपूर, कटहरिया, बंकुल, दिस्तौली, परसिया छितनी सिंह, अहिरौली बघेल, सिकटिया बाजार, रतसिया कोठी, प्रतापपुर, रामपुर, मिश्रौली, जगदीशपुर, हरेराम चौराहा, पड़री बाजार, रहीमपुर,बंगरा, कड़सरवा बुजुर्ग आदि गांवों की बिजली आपूर्ति ठप होने से लोग परेशान रहे। भिंगारी बाजार के अंजय तिवारी, रमेश कुशवाहा, भोपतपुरा के मकसूद अहमद और दिस्तौली के रामायण आदि ने बताया कि तीसरे दिन भी आपूर्ति ठप होने से लोग काफी परेशान हैं।
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बिजली न आने से पढ़ाई बाधित हुई है।
रात में ठीक से सो भी नहीं पाए, क्योंकि मच्छर काफी लगे हैं। सुबह जब बिजली बनी तो राहत मिली है। रात भर अंधेरे में गुजारना पड़ा।
स्तुति मिश्रा, पचौहा -
बिजली एक बार करीब पांच घंटे के लिए गई और उसके बाद आई भी तो आधे घंटे बाद चली गई। इसके कारण सुबह पानी की टंकी खाली थी। हैंडपंप का सहारा लेना पड़ा। लाइट न रहने से इंवर्टर और मोबाइल दोनों बैठ गया था। स्कूल में शिविर था। बिजली न आने से छात्राओं को काफी दिक्कत हुई है।
मृदुला सिंह बघेल, प्रधानाचार्य
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हमारे मोहल्ले में रात से ही बिजली गायब रही। उपकेंद्र पर गया तो पता चला कि लेखपाल ड्यूटी पर हैं। किसी तरह एक बार मैकेनिक से बनवाया तो एक घंटे बाद फिर फाल्ट हो गया। मजबूरी में हैंडपंप से स्नान करना पड़ा। वृज नारायण, उमानगर -
बिजली न रहने से भोजन पकाने के लिए हैंडपंप का पानी उपयोग किया गया। इतना मच्छर लगा कि रात में दिन भी नहीं आई। इसके चलते बहुत परेशानी हुई।
माधुरी त्रिपाठी, गृहिणी
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हड़ताल समाप्त होने के बाद भी देर शाम तक नहीं पहुंचे कर्मचारी
देवरिया। दोपहर बाद करीब तीन बजे हड़ताल समाप्त होने के बाद देर शाम तक उपकेंद्रों पर अभियंता और तकनीकी कर्मचारी नहीं पहुंचे। यहां तक कि उनका फोन भी उपभोक्ता मिला रहे, लेकिन उनमें अधिकतर के मोबाइल फोन ऑफ बता रहे थे। जिन मोहल्लों में फाल्ट हुआ, वहां के लोग दौड़े भागे उपकेंद्र पहुंच रहे थे, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था। इसके चलते कुछ मोहल्लों की समस्याएं बरकरार रहीं।
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हड़ताल से लाखों का हुआ नुकसान
अधीक्षण अभियंता जीसी यादव ने बताया कि शुक्रवार, शनिवार और रविवार को बिजली बिल काउंटर से नहीं जमा हो सका। राजस्व की वसूली भी नहीं हो पाई। नए कनेक्शन भी नहीं हुए। प्रतिदिन जनपद से करीब पांच लाख रुपये बिल जमा होता है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि 31 मार्च तक लक्ष्य पूरा करना था। हड़ताल का असर इस पर पड़ेगा। इसी नाते अवकाश के दिन भी काउंटर खोले गए थे।