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Deoria News: अपने ही निकले बेगाने, किस पर करें विश्वास

Tue, 25 Jul 2023 12:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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देवरिया। जनपद में रविवार की रात में दो जगहों पर रिश्तों को कलंकित करने वाली वारदात हुई। इससे पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें अपने ही जान के दुश्मन निकल रहे हैं। किसी ने प्रेमिका के प्यार की दीवानगी में उसके पति की हत्या कर दी तो किसी ने मामूली बात को लेकर सगे भाई की हत्या कर दी। रिश्तों को कलंकित कर देने वाली घटनाओं को याद कर लोगों का मन अपनों से डरने लगा है। रिश्तों में आई किसी वजह से खटास का भयावह स्वरूप यह है कि जिस व्यक्ति के साथ हर पल गुजारते थे और हंसी खुशी के साथ रहते थे। उसका ही खून कर बैठे।
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मामूली बात पर भाई को मार डाला

2021 में बरियापुर थाना क्षेत्र के सरैया गांव निवासी बिजली निगम के कर्मचारी अरविंद यादव की हत्या उनके सगे छोटे भाई ने की दी थी। इतना ही नहीं कमरे के फर्श पर फैले खून को रात में धुलाई कर शव को बोरे में कस कर फेंक दिया।





प्रेमी संग मिल कर पति को मार डाला

अगस्त 2021 में तरकुलवा थाना क्षेत्र के मैनपुर गांव निवासी जितेंद्र का शव गंडक नदी के किनारे मिला था। इस मामले में मृतक के भाई ने तहरीर दी थी। पुलिस ने मामले का पर्दाफाश किया तो पता चला कि पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या कराने के बाद शव को नदी के किनारे फेंकवा दिया था।
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पति ने गला दबाकर पत्नी को मार डाला

सदर कोतवाली के तिलई बेलवा गांव में रिंकी देवी की दो साल पहले हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने पति पिंटू यादव पर केस दर्ज किया। पुलिस के अनुसार मामूली तकरार के बाद पति ने ही पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी थी।


बढ़ती भौतिकवादी प्रवृत्ति के कारण रिश्तों की अहमियत और समझ कम होती जा रही है। प्रत्येक व्यक्ति भौतिक उपलब्धि या धन दौलत की चाहत में है। ऐसे में कभी-कभी अपने नजदीकी संबंधों या खून से जुड़े रिश्तों को भी नुकसान पहुंचाने से नहीं हिचक रहा है। इसके मूल में हमारे परिवार की ओर से संस्कार व रिश्तों की समझ को विकसित किया जाता है, कहीं न कहीं इसमें कोई खामी रह गई होती है।
- डॉ.विवेक मिश्र, असिस्टेंट प्रोफेसर, समाजशास्त्र, संत विनोबा पीजी कॉलेज


पहले परिवार में संस्कार पर जोर दिया जाता था। हिंदू धर्म में तो माता-पिता का दर्जा भगवान के बराबर तो मुस्लिम में मां के पैर के नीचे जन्नत एवं पिता को जन्नत का दरवाजा माना जाता रहा है। यह शुरू से ही संस्कार में डाला जाता था। अब रिश्तों का महत्व कम एवं भौतिक वस्तुओं से लगाव अधिक हो गया है। इसलिए जमीन के लिए भाई या पिता को मार देने की घटनाएं आए दिन सुनने में आ रहीं हैं। ईश्वर के प्रति मनुष्य की दूरी बढ़ रही है, इससे डर कम हो रहा है। वर्तमान पीढ़ी सच्चाई से दूर है, इसलिए मां-बाप की सेवा करने जैसी सुखद अनुभूति से भी दूर होता जा रहा है। ऐसे में मानवता पर दानवता हावी होती जा रही है और ऐसे में आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं।
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- प्रो. नाजिश बानो, मनोवैज्ञानिक
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