-बजरंग बली ने लंका दहन कर माता जानकी से लिया आशीर्वाद
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। माता जानकी का पता लगाते-लगाते प्रभु श्रीराम शबरी माता के आश्रम पहुंचे, जहां श्रीराम के इंतजार में बूढ़ी हो चुकी शबरी माता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने प्रभु श्रीराम को जूठे बेर खिलाए, इस प्रसंग को देख दर्शक भावुक को गए, तो महिलाओं की आंखों से आंसू छलक गए।
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर मेदीपट्टी बघौचघाट परिसर में चल रहे शिव शक्ति महायज्ञ में रामलीला के चौथे दिन भगवान राम शबरी आश्रम पहुंचे और शबरी ने अपनी कुटिया को इतना सजाया था कि प्रभु श्रीराम उनके आतिथ्य से अपने को धन्य समझने लगे। माता शबरी भगवान को फल खिलाने के लिए टोकरी में ताजे बेर लाईं और एक-एक बेर अपने दांतों से काट-काट कर चखने लगीं और प्रभु श्रीराम को अपना जूठा खिलाने लगीं।
भगवान ने भी बड़े प्रेम से झूठे बेर खाए। इस प्रसंग को देखकर महिलाएं रोने लगीं। वहीं लीला में हनुमानजी ने लंका दहन की और माता जानकी को बताया कि मैं भगवान राम का दूत हनुमान हूं। रामलीला में भगवान राम का दरबार सजाया गया था, जिसकी आरती मुख्य यजमान सुरेंद्र लाल श्रीवास्तव और गीता श्रीवास्तव ने किया।
इस दौरान देवेंद्र लाल श्रीवास्तव, प्रमोद चौबे, उग्रसेन दुबे, मधुसूदन मणि त्रिपाठी, मंटू राय, गणेश मिश्र आदि मौजूद रहे।
आहा और स्वाहा से भगवान होते हैं तृप्त
देवरिया। शिव शक्ति महायज्ञ के दौरान चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक डॉ. श्यामसुंदर पराशर ने कहा कि भगवान आहा और स्वाहा से तृप्त होते हैं। भगवान के मुख से अग्नि और ब्राह्मण की उत्पत्ति हुई। अग्नि में हम हवन करते हुए कहते हैं स्वाहा और ब्राह्मण भोजन अपने घर कराते हैं, उन्हाेंने कहा कि अहा का मतलब बहुत अच्छा भोजन तो भगवान तृप्त हो जाते हैं।
कलयुग में भगवान नाम जप मात्र से मुक्ति मिल जाती है। आप और हम पुण्य का फल मीठा खाना चाहते हैं, लेकिन पुण्य करने से घबराते हैं। व्यास पीठ की पूजा सुरेंद्र लाल श्रीवास्तव और सीओ सिटी संजय रेड्डी ने की। इस दौरान गीता श्रीवास्तव, अतुल श्रीवास्तव, ज्वाला दुबे, प्रभुनाथ तिवारी, भीम यादव, महिवाल जायसवाल आदि मौजूद रहे। संवाद