-दोपहर में स्नान ध्यान कर गोबर से बने गोधन व गोधनी के पारंपरिक गीतों के बीच कुटाई की
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गोवर्धन पूजा और भैया दूज पर्व जनपद में बुधवार को परंपरागत ढंग से मनाया गया। सुबह व्रत रहकर बहनों ने भाइयों को श्राप दिया, दोपहर में स्नान ध्यान कर गोबर से बने गोधन व गोधनी के पारंपरिक गीतों के बीच कुटाई की। बहनों ने भाइयों को टीका लगाकर मिठाई खिलाई, भाइयों ने भी उन्हें आशीष दिया।
शहर के विभिन्न मोहल्लों में मंगलवार की रात गोबर से बने गोधन-गोधनी, पहरेदार सहित अन्य आकृतियां युवतियों ने बड़े उत्साह से बनाया। बुधवार की सुबह बहनों ने भाइयों को श्राप देकर संकल्प के साथ व्रत की शुरुआत की। दोपहर में स्नान ध्यान कर गली मोहल्लों में बनीं गोबर की आकृतियों के पास पहुंची। यहां सभी ने पारंपरिक गीत गाए। साथ ही घर से लाए मिष्ठान सहित अन्य प्रसाद सामग्री चढ़ाई। इसके बाद मूसल से गोधन व गोधनी की कुटाई की। इसके बाद गोबर का कुछ अंश लेकर घर गईं। इसके बाद बहनों ने भाइयों को टीका लगाया और मंगल कामना की। भाइयों ने भी बहनों को आशीष व उपहार दिए। गोवर्धन पूजा पूर्ण होने के बाद ही बहनों ने पारण किया।
धूमधाम से मनाई गोवर्धन पूजा
फोटो समाचार
मईल। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश गांव में बुधवार को गोवर्धन पूजा धूमधाम से की। भागलपुर ब्लॉक के कुछ गांवों में सोमवार को गोवर्धन पूजा की। क्षेत्र के नरियावं, गोड़वली, देवसिया, सोनवरसा, पिपरा बांध, पिपरा दवन, बभनियाव आदि गांवों में धूमधाम से बुधवार को की गई। महिलाओं ने तरह-तरह का मिष्ठान गोवर्धन भगवान को चढ़ाए। मंगल गीत गाकर सुख शांति की कामना की। संवाद
-
फोटो समाचार।
परंपरागत ढंग से मनाया गया भैया दूज
महिलाओं ने गोवर्धन बनाकर किया पूजन अर्चन, गाये मंगल गीत
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। भैया दूज का त्योहार बुधवार को परंपरागत ढंग से मनाया गया। महिलाओं ने गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा अर्चना की और उसके बाद उसे कूटकर त्योहार मनाया। इस दौरान कटीले पौधे की टनियां और मिठाई चढ़ाकर श्राप देकर बहनों ने भाइयों के जीवन की मंगल कामना की।
पूर्वांचल में गोवर्धन पूजा के बाद मांगलिक कार्यक्रमों की लोग शुरुआत करते हैं। गांव से शहर तक मोहल्लों में गोबर से गोवर्धन बनाए गए। कंटीले पेड़ की टहनी और पत्ते को गोवर्धन पर चढ़ाया गया। इस अवसर पर जुटी महिलाओं ने मंगल गीत गाये। दोपहर मूसल से कूट कर लोग गोबर को अपने घरों में अनाज के ढेर में रखने के लिए लेकर गए। वहीं शाम को लड़कियों ने पीड़िया लगाकर पूजा की। बहनों के घर पहुंच कर भाइयों ने पकवान खाए।
-