सलेमपुर। नगर पंचायत कार्यालय के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन के आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी ने गिर्राज पूजन की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि इंद्र को जब अभिमान हो गया था कि मैं राजा हूं। श्रीकृष्ण ने बाबा नंद से कहा कि हमारे यहां किस बात की पूजा की तैयारी चल रही है। नंद ने बताया हम साल में एक बार इंद्र की पूजा करते हैं। श्रीकृष्ण ने कहा कि इंद्र की पूजा क्यों करते हैं। नंद ने कहा कि बेटा इंद्र मेघों की मूर्ति हैं। उनकी पूजा करने से समय-समय पर वृष्टि होती है। बृजवासियों के साथ में भगवान ने गिर्राज की पूजा की शुरुआत करवाई। गिरिराज का रूप धारण कर स्वयं गोवर्धन नाथ के रूप में प्रकट हुए। बृजवासियों का भोग स्वीकार किया और जब आरती करने के बाद गोवर्धन नाथ की जयकारा लगाया तो इंद्र ने नारद से पूछा किस बात का जयकारा लग रहा है। नारद ने कहा कि जहां आपकी पूजा होती थी, वहां पर अब नंद के लाला ने अपने स्वयं की पूजा, गिरिराज के रूप में करवा ली है। संवाद