देवरिया। एक गुमनाम पत्र के जरिए महिला शिक्षिका की ओर से जिले के एक खंड शिक्षा अधिकारी व एक शिक्षक संगठन के दो पदाधिकारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के मामले में चिह्नित किए गए अनुदेशक और बाहरी व्यक्ति पर बेसिक शिक्षा कार्यालय अभी तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। विभाग की बदनामी होते देख पहले इसे लेकर विभागीय अधिकारी सख्ती के मूड में दिख रहे थे। हालांकि, इधर उनके तेवर ठंडे पड़ गए हैं।
प्रकरण ने प्रदेश स्तर पर जिले के बेसिक शिक्षा कार्यालय का नाम खराब किया है। इसे अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं। सात सितंबर को अमर उजाला ने शिक्षक संघ के दो पदाधिकारियों पर लगा यौन शोषण का आरोप शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। गुमनाम पत्र के जरिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेज अंतरजनपदीय स्थानांतरण के बाद किसी अन्य जनपद में गई शिक्षिका ने अवगत कराया गया था कि वह जिले के एक ब्लॉक में पिछले कई वर्षों से कार्यरत थी। पत्र के माध्यम से आरोप लगाया था कि एक बार शिक्षक संघ के दो पदाधिकारी व खंड शिक्षाधिकारी अपने साथ एक होटल में विद्यालय के काम का बहाना बनाकर ले गए थे। यहां पर तीनों ने उनके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए थे। खंड शिक्षाधिकारी ने मुंह बंद रखने की धमकी दी थी। कहा था कि किसी को बताया तो संस्पेंड कर दिया जाएगा। पत्र में आरोप लगाया गया था कि संगठन के पदाधिकारी अधिकारियों की शह पर विद्यालय छोड़कर घूमते रहते हैं और महिला शिक्षिकाओं को चिह्नित कर बीईओ को जानकारी देते हैं। इसके बाद बीईओ इन शिक्षिकाओं के विद्यालय का निरीक्षण करते हैं और दलालों के माध्यम से एक दिन की अनुपस्थिति पर 1500 रुपये, एक सप्ताह तक नहीं आने पर 4500 रुपये की मांग करते हैं। खबर के प्रकाशित एवं पत्र के कई मंचों पर वायरल होने के बाद से ही बेसिक शिक्षा जगत में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। डीएम स्तर से इस मामले में समिति का गठन कर जांच की कार्रवाई शुरू हो गई। हालांकि, संबंधित शिक्षिका के सामने नहीं आने से बीईओ व दो पदाधिकारियों पर लगे आरोप अब बेदम हो रहे हैं। उधर, विभाग ने इस मामले की जांच में एक अनुदेशक और एक बाहरी व्यक्ति को चिह्नित किया, जो यह प्रकरण उछालने में सहायक बने। इन पर कार्रवाई की भी बात कही गई, हालांकि अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
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मामले में अधिकारियों का रुख देखा जा रहा है। बीएसए ने जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपने की बात कही है। जो भी शिक्षक संगठन ऐसे कृत्य में लिप्त रहे हैं, एक दिन उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी। जिले का नाम खराब करने वाले इस प्रकरण को तूल देने में जो भी आरोपी पाए गए हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि पुन: ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
- शैलेंद्र कुमार सिंह, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
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जिले में शिक्षक संघों की आपसी गुटबाजी के चलते ऐसे आरोप देखने में आ रहे हैं। जांच रिपोर्ट में एक पक्ष के सामने नहीं आने से यौन उत्पीड़न के आरोप स्वत: ही खारिज हो गए। इसकी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
...शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए