देवरिया। गाजियाबाद में एक प्रापर्टी की रजिस्ट्री में लगे ई स्टांप फर्जी पाए जाने के बाद जिले में एक साल के भीतर 50 लाख से अधिक की 250 संपत्तियों के रजिस्ट्री की जांच शुरू कर दी गई है। एआईजी स्टांप ने सभी तहसीलाें से 50-50 रजिस्ट्री का ब्योरा तलब किया है। वहीं, दूसरी तरफ कोषागार में आठ करोड़ 29 लाख रुपये का फिजिकल स्टांप डंप पड़ा हुआ है। जिसको उपयोग में लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
केवल दस रुपये के ई-स्टांप को बेहद सफाई के साथ छेड़छाड़ कर एक लाख दस हजार बना दिए जाने के शक में जिले में 50 लाख रुपये से अधिक की संपत्तियों की जांच शुरू हो गई है। निबंधन कार्यालय के अनुसार जिले के बरहज, देवरिया, भाटपाररानी, सलेमपुर, रुद्रपुर तहसील में करीब 1100 बैनामे हुए हैं। इनमें 50 लाख रुपये से अधिक के ई-स्टांप का प्रयोग किया गया है। विभाग को शक है कि फर्जीवाड़ा करने वालों का नेटवर्क पूरे प्रदेश में है। इसलिए यहां भी ऐसे मामले निकल कर सामने आ सकते हैं।
ऐसे में एआईजी स्टांप ने सभी तहसीलों से 50-50 ऐसी बड़ी संपत्तियों के बैनामे के ई स्टांप को अपने पास मंगाया है। जिसकी विभाग तकनीकी रूप से जांच करेगा। इसके बाद रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। इसमें सबसे अधिक बैनामे देवरिया शहर के हैं, जिनमें ई-स्टांप अधिक लगा है। वहीं, दूसरी तरफ कोषागार ने एआईजी स्टांप को जानकारी दी है कि आठ करोड़ 29 लाख 800 के ई स्टांप काफी दिनों से डंप पड़े हैं। इसमें सबसे अधिक 25 हजार के हैं, जिनकी संख्या 1040 है। इसे खपत करने के लिए ई स्टांप की जगह इसका उपयोग किया जाए ताकि डंप स्टांप का उपयोग हो सके।
पुरानी रजिस्ट्री के ई-स्टांप की जांच में आ रही है दिक्कतें, कैसे करें फर्जीवाड़े की पहचान
देवरिया। 50 लाख से अधिक के ई-स्टांप का ब्योरा जुटाने के बाद जांच में भी दिक्कतें आ सकती हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक ई-स्टांप का उपयोग करने के बाद फोटो कापी विभाग के पास मौजूद होती है। इसकी जांच करने के दौरान क्यूआर रीड करने में दिक्कत आ रही है, क्योंकि फोटो कापी धुंधली हो गई है। इसके चलते कोषागार में जमा धन की भी जांच विभाग करेगा, ताकि रुपये का मिलान होने के बाद सच्चाई सामने आ सके। संवाद
पहले भी फर्जी स्टांप से बैनामे का हो चुका है खुलासा
देवरिया। तेलगी स्टांप घोटाले के समय फर्जी स्टांप पेपर का प्रयोग कर सरकारी ठेकेदारी प्राप्त करने का मामला जिले में उजागर हो चुका है। पूर्व एमएलसी की शिकायत पर ईओडब्ल्यू वाराणसी ने इसकी जांच की थी। इस मामले में जिले के नौ लोग नामजद हुए थे। इसमें एक वेंडर भी नामजद हुआ था। संवाद
फर्जीवाड़े से बचने को यह बरतें सावधानी
- पंजीकृत वेंडर से ही स्टांप खरीदें
- जितनी धनराशि का स्टांप खरीद रहे हैं उसका मिलान कर लें
- क्रेता और विक्रेता दोनों के नाम मिलान कर लें
- बार कोड रीडर से जांच करा लें
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50 लाख से अधिक के ई-स्टांप से बैनामा कराई गई संपत्तियों की जांच शुरू कर दी गई है। सभी तहसीलों से 50-50 बैनामे तलब किए गए हैं। जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि कहीं फर्जी स्टांप का प्रयोग हुआ है कि नहीं।
- पंकज कुमार सिंह, सहायक महानिरीक्षक, स्टांप व पंजीयन