तिघरा-मराछी बांध पर नहीं हो रहा निरोधात्मक कार्य
बारह करोड़ रुपये से होने हैं सुरक्षात्मक कार्य, टेंडर होने के बाद भी शुरू नहीं हुआ
जियो बैग से बनकटी, नीबा के समीप कटान रोकने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी।
एकौना/रुद्रपुर। तिघरा-मराछी बांध पर टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी अब तक निरोधात्मक कार्य शुरू नहीं हो पाया। ऐसे में जलस्तर बढ़ने पर लोगों को बांध के कटने का खतरा सता रहा है। बंधे पर दो स्थानों पर करीब सात करोड़ रुपये की लागत से जियो बैग से कटान रोकने की योजना है। बांध पर बनकटी और नीबा के समीप कार्य कराया जाना है।
राप्ती नदी के तट पर स्थित 13 किलोमीटर लंबा तिघरा-मराछी बांध कई जगहों पर जर्जर हो चुका है। रेनकट्स और चूहों ने बांध को छलनी कर दिया है। बनकटी और नीबा के समीप यू टर्न करके काट रही नदी के वेग को रोकने के लिए बारह करोड़ रुपये से कार्य कराया जाना है। विभाग की ओर से कटान रोकने के लिए बांस-बल्ली लगाकर छोड़ दिया गया है।
जलस्तर में उतार-चढ़ाव से कटान करते हुए राप्ती नदी बंधे के समीप तक पहुंच गई है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अवर अभियंता अरविंद कुमार यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट शुरू कराने की सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। ठेकेदार को बंधे पर कार्य कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। कार्य में देरी को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है।
बोले बाढ़ प्रभावित
बनकटी गांव के लक्ष्मण भारती ने कहा कि सिंचाई विभाग दोआबा में बाढ़ का इंतजार कर रहा है। जलस्तर बढ़ने पर आनन-फानन कार्य करा कर भुगतान करा दिया जाता है। मौसम अनुकूल होने पर कार्य नहीं कराया जा रहा है।
नीबा गांव के सुरेमन पासवान ने कहा कि पिछले वर्ष बंधे पर लाखों रुपये का कार्य जलस्तर कम होने पर कराया गया, जो नदी में एक माह बाद ही गिर गया। मामले में कोई जांच भी नहीं हुई। अब बंधा जर्जर हालत में पड़ा है।
अमरजीत कुमार ने कहा कि सिंचाई विभाग बंधे पर बोरी में मिट्टी डाल कर कटान रोकने के उपाय ढूंढ रहा है। धन स्वीकृत होने के बाद भी सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं हो रहे। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है।
उपेंद्र कुमार ने कहा कि अधिकारी आग लगने पर कुआं खोदने का कार्य करते हैं। नीबा और बनकटी गांव के सामने नदी सीधे कटान कर रही है। गांव को बचाने के लिए धरातल पर कोई कार्य नहीं दिख रहा।