महीने भर चला संचारी रोग नियंत्रण अभियान फिर भी नहीं बदली जिले की तस्वीर, कई लोगों को नहीं है अभियान की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अप्रैल माह में संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत शहर और गांव में जलभराव वाले स्थानों को चिह्नित कर छिड़काव किया जाना था। पर शहर में कई ऐसे मोहल्ले हैं, जहां पर खाली प्लाट और सड़कों पर पानी भरा हुआ है। इन जगहों पर संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत न ही दवा छिड़काव हुआ और न ही लोगों को जागरूक किया गया। केवल हर घर दस्तक देकर दवा और लोगों को जागरूक करने वाला यह अभियान कागजों में सिमट कर रह गया। मोहल्ले के लोगों को इस अभियान के बारे में जानकारी तक नहीं है। जबकि हाईिरस्क क्षेत्र चिह्नित होने के बाद भी अफसर कागजों में सफल होने का दंभ भर रहे हैं।
संचारी रोग के रोकथाम के लिए एक अप्रैल से जागरूकता अभियान चलाया गया था। स्वास्थ्य महकमे का मानना है कि संचारी रोग के प्रति हर घर तक जानकारी पहुंचने से बीमारियां रुकेंगी। जमीनी हकीकत यह है कि शहर के गली-मोहल्लों में जलभराव वाले स्थान हैं, जहां मच्छर का प्रजनन होता है। लोगों को शाम ढलते ही मच्छरों का डंक सहना पड़ता है। रविवार को अभियान की पड़ताल की गई तो शहर के रामनाथ देवरिया पश्चिमी में राकेश मिश्र, एके श्रीवास्तव, शिवपुरम में हरेराम मणि के मकान के पास, सिंचाई विभाग कॉलोनी, रामगुलाम, आंबेडकर नगर, खरजरवा, स्टेडियम रोड सहित कई जगहों पर जलभराव देखने को मिला। इतना ही नहीं इन मोहल्लों में नाली जाम होने से पानी सड़क पर फैला था। इसके चलते संचारी रोग अभियान के तहत होने वाले छिड़काव और बचाव कार्य का असर इन मोहल्लों में नहीं दिख रहा है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।
अभियान के तहत ये कार्य होना है
- संचारी रोग नियंत्रण अभियान साल में तीन बार बारिश से पहले, बारिश के मौसम में तथा उसके बाद चलाया जाता है। इसमें साफ-सफाई और छिड़काव होता है, जिससे गंदगी और जलभराव न हो, ताकि मच्छरों के प्रकोप से बचा जा सके। इसमें 12 विभाग शामिल होते हैं। इनके सामंजस्य से अभियान चलता है। राजस्व, नगर निकाय, शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य विभाग आदि होते हैं। संचारी रोग वेक्टर बांड डिजीज है। इसमें मलेरिया, एईएस, जेई, डेगूं, चिकनगुनिया, स्क्रब्टाइफस, लैप्रोस्पायोरेसी बीमारी शामिल है। ये मच्छरों के काटने, चूहे, छछूंदर, जानवरों के मल मूत्र से फैलती है, ताकि इन्हें रोका जा सके। जबकि 17 अप्रैल से चल रहे दस्तक अभियान में स्वास्थ्य कर्मी व आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर संक्रामक रोग पीड़ितों का हेल्थ सर्वे की। खांसी-जुकाम के लक्षण वाले मरीजों के साथ ही मलेरिया, डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियों के मरीजों की तलाश की गई। खांसी, सर्दी, बुखार के करीब 150 मरीज मिले। जांच में सामान्य रहा।
कालाजार का संदिग्ध एक मरीज मिला
संचारी रोग अभियान के तहत साफ-सफाई व छिड़काव का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। अभी कुछ दिन पहले बनकटा ब्लाक क्षेत्र में कालाजार का संदिग्ध एक मरीज मिला था। उसे मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू में भर्ती कर इलाज किया गया। पिछले साल अक्तूबर में चले दस्तक अभियान में 235 रोगी बुखार के चिह्नित किए गए थे। इनमें जांच में एक रोगी मलेरिया का मिला था। वहीं कोविड के 179 संभावित मरीज चिह्नित किए गए। इनकी जांच में 13 कोविड पॉजिटिव पाए गए। वहीं 230 टीबी के मरीज मिले। पिछले साल जनवरी से लेकर दिसंबर तक डेंगू के 93 मरीज मिले थे।
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जनपद में 23 हाईिरस्क क्षेत्र चिह्नित किए गए थे
- प्रशासन ने जनपद में 23 हाईिरस्क क्षेत्र चिह्नित किए थे। इनमें पांच नगरीय व 18 ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। देवरिया नगर, सलेेमपुर, बरहज, रामपुर कारखाना, मझौलीराज नगरीय क्षेत्र में शामिल हैं। कोट:
- जल निकासी के इंतजाम नहीं किए गए हैं। खाली जमीन पर नाबदान का पानी एकत्र होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। पानी सड़ने से दुर्गंध के कारण परेशानी होती है। इससे बीमारी फैलने का खतरा रहता है।
अतुल कुमार मिश्र, रामनाथ देवरिया
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कॉलोनी में जल निकासी की व्यवस्था न होने से आवास के सामने लोगों के घरों का पानी हमेशा लगा रहता है। इसकी दुर्गंध से आसपास के लोगों का रहना दूभर हो गया है। मच्छर से बचाव के लिए क्वायल और अगरबत्ती जलानी पड़ती है, इसके बाद भी मच्छर भनभनाते हैं।
शीला देवी, सिंचाई विभाग कॉलोनी
- घर के पास जलभराव होने से मच्छरों के प्रकोप से नींद नहीं आती है और दिन में चैन नहीं रहता है। संचारी अभियान का मतलब नहीं है। कई बार शिकायत करने के बाद भी नगर पालिका की ओर से छिड़काव नहीं किया गया और न ही जल निकासी के इंतजाम ही किए गए हैं।
उपेंद्र शाही, आंबेडकर नगर
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- संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत दस्तक में आशा व स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया। कालाजार का संदिग्ध एक मरीज मिला है। अभियान में कर्मी मनोयोग से जुटे रहे, उसकी मॉनीटरिंग भी की गई।
डॉ. राजेश झा, सीएमओ
- रोस्टर वार वार्डों में साफ-सफाई के साथ कीटनाशक का छिड़काव कराया गया। मच्छरों की रोकथाम के लिए फागिंग भी कराई गई है। इसके लिए सफाई कर्मी तैनात किए गए थे। जिन स्थानों पर जलभराव की सूचना मिलती है, वहां छिड़काव कराया जाता है और साफ-सफाई भी होती है।
रोहित सिंह, ईओ