देवरिया। शहर के एक स्कूल में पढ़ने वाले अंश प्रताप सिंह की झूले से गिरकर मौत से हर कोई स्तब्ध है। अभिभावकों को उनके बच्चों की चिंता सता रही है। यह बात तो स्कूल के अंदर की है। मगर स्कूली बच्चों के इर्द-गिर्द तमाम खतरे और भी मंडरा रहे हैं। कहीं पर खुले ट्रांसफार्मर तो कहीं बिजली के लटकते तार, इतना ही नहीं गेट के पास टूटे स्लैब से भी बच्चों को खतरा है। अनजाने आटो और ई-रिक्शा चालक, खुले नालों और भारी वाहनों के बीच बच्चे हर पल खतरे का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अगर अभिभावक जागरूक नहीं हुए तो नौनिहाल कब हादसे के शिकार हो जाएं, कहा नहीं जा सकता है।
हालत यह है कि घर से स्कूल के बीच के खतरों से हर कोई बेपहरवाह है। बिना जांच पड़ताल के स्कूल में लगाए गए ई-रिक्शा और ऑटो से विद्यालय जाने वाले बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। ज्यादातर अभिभावकों को यही नहीं मालूम है कि चालक कौन है, कैसा व्यक्ति है। कोई बड़ी बात नहीं है कि दिल्ली-एनसीआर में हुई घटनाओं की तरह चालक ही बच्चों के लिए खतरा बन सकते हैं। इतना ही नहीं, स्कूल की छुट्टी के समय भी बच्चों को काफी सांसत झेलनी पड़ रही है। तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच सड़क पार कर अपनों तक पहुंचने के लिए रोजाना जोखिम उठाना पड़ता है।
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स्कूल से चंद कदमों की दूरी पर खुले में ट्रांसफार्मर और लटकते बिजली के तार
देवरिया। जिले के 124 परिषदीय स्कूलों के ऊपर से हाईटेंशन तार और ट्रांसफार्मर बगल में लगे हुए हैं। शहर के सीसी रोड से हर रोज हजारों छात्रों का आना-जाना होता है। इस मार्ग पर कांवेंट स्कूल से करीब डेढ़ मीटर की दूरी पर तीन ट्रांसफार्मर खुले में हैं, जो सड़क के एकदम किनारे हैं, जहां पर सुरक्षा का कोई उपाय नहीं है। कतरारी रोड पर दो विद्यालय ऐसे हैं, जिनसे सौ मीटर की दूरी पर ट्रांसफार्मर खुले में लगे हैं। राघव नगर मोहल्ला शहर का सबसे व्यस्ततम मोहल्ला है। यहां भी खुले ट्रांसफार्मर से कुछ फीट की दूरी से छात्रों का आना-जाना होता है। एक चिंगारी अगर किसी पर गिर जाए तो बड़ा हादसा हो जाएगा। कस्तूरबा इंटर कॉलेज और कोतवाली रोड पर भी ऐसे ही हालात हैं। सलेमपुर कोतवाली थाना क्षेत्र के चांदपलिया गांव निवासी व दरोगा उमाशंकर के पुत्र अमित कुमार (16) की नवंबर 2022 में कोचिंग से वापस घर लौटते समय एक स्कूल के पीछे पोल पर लटक रहे हाईटेंशन तार की चपेट में आने से मौत भी हो चुकी है।
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खुली नाली और टूटे स्लैब से हादसे का खतरा
देवरिया। शहर के सीसी रोड स्थित एक स्कूल के पास खुला नाला है और स्लैब भी टूटा हुआ है। गेट से निकलते ही अगर थोड़ी सी चूक हो तो छात्र नाले में गिर जाएंगे। यही हाल कस्तूरबा बालिका इंटर कॉलेज के पास का है। यहां पर लगा काउकैच जर्जर हो चुका है। कोतवाली रोड पर प्राथमिक विद्यालय के पास का नाला खुला है।
कोट:
- बच्चों को स्कूल भेजते समय अभिभावक को सजग रहना चाहिए। इसलिए बच्चों को ऐसे ऑटो से भेजना चाहिए, जिनके बारे में पूरी जानकारी हो। प्रयास करें कि परिवार का सदस्य खुद समय निकाल कर बच्चे को स्कूल ले जाए। मैं तो जब तक बच्चा आ नहीं जाता है तब तक निश्चिंत नहीं रहती।
- हेमलता त्रिपाठी
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बच्चे को स्कूल भेजते समय हमेशा सतर्क रहना चाहिए। बच्चे को किसी दूसरे वाहन पर न बैठाएं, अपने खुद ले जाकर स्कूल छोड़ें, यह बेहतर होगा। स्कूल के छात्रों ले जाने वाले ऑटो चालकों के परिचय पत्र प्रशासन को बनाने चाहिए। बच्चे की सुरक्षा का हमेशा ध्यान रखें।
- विष्णु मोहन श्रीवास्तव, अधिवक्ता
आटो में ठूंस कर ले जाए जा रहे बच्चे आपके घर के तो नहीं
देवरिया। ज्यादा बच्चों को बैठाने के लालच में ऑटो की आगे की सीट पर ठूंसा जा रहा है। अगर बच्चे चंचल हैं और ताकझांक करने लगे तो हादसे के शिकार हो सकते हैं। ऐसे में अभिभावकों की भी जिम्मेदारी बड़ी हो जाती है, वे सतर्क रहें और जरूर सत्यापित कर लें कि ई-रिक्शा और ऑटो चालक का चाल-चलन ठीक है या नहीं। उनके बच्चे स्कूल सुरक्षित तरीके से आ-जा रहे हैं कि नहीं।