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कृषि डेयरी मंत्रालय की ओर से कपरवार के शिक्षक विवेकानंद मिश्र को मिला था निमंत्रण पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। 75वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कपरवार निवासी शिक्षक विवेकानंद मिश्र, उनकी पत्नी आराधना मिश्र सहित आठ परिवारों को निमंत्रण मिला था। उन्हें राजपथ पर नजदीक से भारतीय संस्कृति, राजनीति और रक्षा क्षेत्र का अद्भुत नजारा पहली बार देखने को मिला। भारत सरकार की ओर से सभी को प्रतीक चिह्न आदि देकर सम्मानित किया गया है। गांव आने पर इन्होंने अपने अनुभव साझा किए।
कृषि डेयरी मंत्रालय की ओर से कपरवार के शिक्षक विवेकानंद मिश्र के अलावा दीनानाथ साहनी, सुभाष चंद्र साहनी, रामेश्वर, आराधना, धाना सहित आठ परिवार को गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में परेड देखने का निमंत्रण पत्र मिला था। 25 जनवरी को गोरखपुर हवाई अड्डा से दोपहर दो बजे सभी लोग दिल्ली के लिए रवाना हुए। वहां उन्हें होटल में ठहराया गया। 26 जनवरी की भोर में चार बजे सरकारी वाहन से सभी लोग परेड ग्राउंड पहुंचे। इस बीच उन्हें करीब आठ जांचों से गुजरना पड़ा था। विवेकानंद मिश्र का कहना है कि नजदीक से बग्घी पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और फ्रांस के प्रेसीडेंट इमैनुअल मैक्रों का गुजरना देखने योग्य था। पहली बार देश के विभिन्न प्रांतों की सांस्कृतिक, राजनीतिक विरासत के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र के आयुध हथियारों के जरिए देश की शक्ति देखने को मिली।
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परेड ग्राउंड पर बच्चों का साथ न होने की खल रही थी कमी
बरहज। दिल्ली राजपथ से परेड देखकर लौटे कपरवार गांव निवासी विवेकानंद मिश्र, उनकी पत्नी आराधना देवी आदि का कहना है कि यह अवसर पहली बार मिला था, लेकिन परेड ग्राउंड पर बच्चों का साथ न होने की कमी खल रही थी। उनका कहना है कि नवंबर में गांव के 25 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें आठ परिवारों का चयन किया गया था। बुलावा पत्र पर सभी में काफी उत्साह था। लेकिन बच्चों को साथ ले जाने की अनुमति नहीं होने की कमी खली।