अलीनगर व शहीदनगर में बरसात के दिनों में भर जाता है पानी
विधायक बोले-पुल बनाने के लिए भेजा गया है प्रस्ताव, जल्द पूरी होगी प्रक्रिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कुर्ना नाले के किनारे शहर की दो कॉलोनियां अलीनगर और शहीदनगर बसी हैं। ये वार्ड नंबर 32 में आती हैं। इन कॉलोनियों में बरसात के दिनों में दो से तीन महीनों तक दो से तीन फीट तक पानी भर जाता है। न तो बच्चे स्कूल जा पाते हैं और न ही लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों की खरीदारी करने घरों से निकल पाते हैं। अगर इसी बीच किसी की तबीयत बिगड़ गई तो समझिए कि परेशानी और बढ़ जाती है। बरसात के दिनों में यहां से निकलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना कठिन हो जाता है। मोहल्लेवासियों का कहना है कि दहशत के दो-तीन महीने जिंदगी का इम्तिहान बन जाता है। अगर कुर्ना नाले के बांध की मरम्म्त हो और उसे पक्का बनाकर ऊंचा कर दिया जाए, साथ ही अलीनगर और शांतिनगर को जोड़ने वाले लकड़ी के पुल की जगह स्थायी पुल का निर्माण हो जाए तो उन्हें बरसात में जलभराव व बाढ़ का सामना नहीं करना पड़ेगा। उधर, विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी का कहना है कि पुल निर्माण की प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी। प्रस्ताव भेज दिया गया है।
बृहस्पतिवार दिन में 12 बजे से डेढ़ बजे के बीच जब अमर उजाला की टीम अलीनगर और शहीदनगर पहुंची तो वहां के लोगों की पीड़ा बरबस ही छलक पड़ी। स्कूलों से छुट्टी होने के बाद बच्चे लकड़ी के पुल से आ जा रहे थे। ताड़ के पेड़ और पटरियों के सहारे बनाए गए इस पुल पर लगातार आवाजाही के कारण यह एक तरफ से झुक गया है। ऐसे में इस पर चलने वाले छोटे हों या बड़े जान पर खतरा मोल लेकर ही पुल पार करते हैं। शांतिनगर के मोहम्मद सोबराती, निसार अहमद बरसात की आहट से ही दहल जाते हैं। उनका कहना है कि जब भी बरसात आती है तो उन्हें या तो घरों में कैद होना पड़ता है या फिर उन्हें बेघर होना पड़ता है। वे बताते हैं कि इसके लिए कई बार नगर पालिका, जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई पर कोई फायदा नहीं हुआ। इस बार भी बरसात से पहले नाले के बंधे की मरम्म्त और उसे ऊंचा करने की मांग की गई है। नगर पालिका ऊंची सड़क बनवा दे। उससे भी राहत मिलेगी। पानी नहीं भरने पाएगा। अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया तो फिर सांसत तय है।
दवाई-पढ़ाई तक से महरूम हो जाते हैं कॉलोनीवासी
कुर्ना नाले में जब पानी बढ़ता है तो मोल्लेवासियों की सांसें भी फूलने लगती हैं। कुर्ना पर बने अस्थायी लकड़ी के पुल से गुजरने में भय लगता है। मोहल्लेवासी बताते हैं कि बंधे रैट होल होने से जर्जर हो गए हैं। बरसात में जब पानी का दबाव बढ़ता है तो नाला जगह-जगह रिसने लगता है। फिर बांध कट जाता है और पूरी कॉलोनी बाढ़ के पानी से भर जाती है। ऐसे में बच्चों को पढ़ाई-लिखाई तो मरीजों-बुजुर्गों को दवाई की चिंता सताने लगती है। अधिक पानी भरने के कारण उन्हें इन सबसे महरूम भी होना पड़ता है। इमरजेंसी में ट्यूब आदि का सहारा लेकर बहुत ही जरूरी चीजों का बंदोबस्त करते हैं। करीब चार सौ आबादी की इन दोनों कॉलोनियों के तीन सौ से अधिक बच्चे इसी लकड़ी के पुल से आने-जाने को मजबूर हैं।
नाले में लकड़ी के पुल से गिर चुके हैं बच्चे
शहीदनगर और शांतिनगर को जोड़ने वाला लकड़ी का पुल निकाय चुनाव में प्रत्याशियों व उनके समर्थकों की आवाजाही के कारण टेढ़ा हो गया है। कॉलोनी के लोग बताते हैं कि एक ही बार में पुल से दो-ढाई सौ लोग आते-जाते थे। इसकी वजह से पुल तिरछा हो गया है। जब भी छोटे बच्चे या बुजुर्ग पुल से गुजर रहे हैं तो एक आशंका बनी रहती है। निसार अहमद बताते हैं कि पिछली बरसात में नाला उफान पर था। पुल पार करते समय तीन बच्चे गिर गए थे। उनमें से दो का पता नहीं चला।
रैटहोल के कारण जर्जर हो गया है कुर्ना नाले का बंधा
शहीदनगर और अलीनगर के बीच से बहने वाले कुर्ना नाले का बंधा कमजोर हो गया है। जगह-जगह रैट होल होने के चलते यहां के लोगों को बरसात में कटान का डर सता रहा है। यहां पक्का पुल बने तो उनका रास्ता थोड़ा आसान हो जाएगा। मनौव्वर अंसारी ने बरसात से पहले यहां ठोस कदम उठाने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है।
25 हजार में हर साल कराते हैं पुल की मरम्मत
अनवर अंसारी बताते हैं कि बरसात आने के पहले कॉलोनी के लोग 25 हजार चंदा जुटाकर लकड़ी का पुल दुरुस्त कराते हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ आने पर उनके घर में पानी और जहरीले जीव न घुसें, इसलिए हर घर की नींव ऊंची बनाकर उसके आगे रैंप बना दी गई है।
वर्जन
बरसात में जीवन कठिन हो जाता है। कभी-कभी यह पछतावा भी होता है कि यहां मकान क्यों बनवा लिया। कई बार अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों से बाढ़ और जलभराव से निजात दिलाने की मांग की गई पर कोई फायदा नहीं हुआ। पक्का पुल बने तो समस्या कम हो।
मोहम्मद सोबराती, अलीनगर
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तीन सौ से अधिक बच्चे इस पुल से होकर पढ़ने जाते हैं। उन्हें डर भी लगता है पर दूसरा रास्ता बहुत घूमकर है, इसलिए बच्चे इस पुल का सहारा लेते हैं। यहां अगर पक्का पुल बन जाए तो सबके लिए सहूलियत होगी। नगर पालिका प्रशासन सड़क ऊंची करवा दे और नाली बनावा दे तो जलभराव नहीं होगा।
अनवर अंसारी, शहीदनगर
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अल्लाह से यही मनाते हैं कि किसी की तबीयत न खराब हो। बरसात में इतना पानी भर जाता है कि मरीजों को ले आने-ले जाने में बहुत परेशानी होती है। जिनके परिवार में कई सदस्य होते हैं वही किसी तरह टांग कर ले जा पात हैं। गर्भवती महिलाओं को भी भारी दिक्कतों से गुजरना पड़ता है।
बदरुन्ननिशा, शहीदनगर
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यहां हर घर में बाढ़ से बचने के लिए घर के आगे रैंप बनवाया गया है, ताकि बरसात में सांप-बिच्छू आदि आसानी से घर में न घुस पाएं। साथ ही रैंप होने से पानी घुसने का खतरा भी नहीं होता है। मनौव्वर अंसारी, शहीदनगर
वार्ड नं 32 के लोगों को बाढ़ और जलभराव से राहत मिले, इसके लिए मैं ठोस प्रयास करुंगा। चूंकि मैं खुद इससे परेशान रहा हूं। ऐसे में मैं यहां के लोगों की पीड़ा से वाकिफ हूं।
तसलीम मल्लू, नवनिर्वाचित सभासद, वार्ड नं 32
बजट आने पर शहर के निचले इलाकों की सड़कों को ऊंचा कराएंगे। पूरा प्रयास रहता है कि कहीं भी जलभराव न होने पाए।
रोहित सिंह, ईओ, नगर पालिका
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शहीदनगर और अलीनगर को जोड़ने वाले लकड़ी के पुल की जगह पक्का पुल बनवाने के लिए प्रयासरत हूं। प्रस्ताव भेजा गया है। चुनाव आचार संहिता के कारण इसमें देरी हुई। इन दोनों कॉलोनियों में कुछ सड़कें भी बनावाई हैं। इससे वहां के लोगों को राहत मिली है। पूरा प्रयास है कि पुल जल्द से जल्द बनवाया जाए।
डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी, विधायक, सदर