पूर्व सीएमओ की पेंशन से होगी किट घोटाले की रिकवरी
शासन ने पत्र भेजकर संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए कहा
बिना वेयरहाउस की डिमांड के ही खरीदी गई सिफलिस व रैपिड टेस्ट किट
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जनपद में रैपिड-सिफलिस टेस्ट किट घोटाले में एक के बाद एक नई हकीकत सामने आ रही है। निदेशक प्रशासन, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा की जांच में दोषी पाए गए पूर्व सीएमओ डॉ. आलोक पांडेय की पेंशन से वसूली करने का आदेश भी राज्यपाल ने संबंधित अधिकारियों को दिया है। ऐसे में अब पूर्व सीएमओ की पेंशन से खरीद में हुई वित्तीय अनियमितता की रिकवरी होनी तय है।
शासन ने इस वर्ष सितंबर में आदेश जारी करते हुए जिले के सीएमओ और मुख्य कोषाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए लिखा है। हालांकि, शासन की कोई चिट्ठी मिलने से सीएमओ इन्कार कर रहे हैं। उधर, किट घोटाले की जांच अभी जारी है। जांच के बाद घोटाले के दोषियों की संख्या बढ़ सकती है। जांच में निर्धारित दर से 10 गुना अधिक पर दर पर किट खरीदने की पुष्टि हो चुकी है।
सूत्रों की मानें तो निदेशक प्रशासन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि किट खरीदने के संबंध में वेयर हाउस ने कोई डिमांड नहीं की थी। उसके बाद भी खरीद कर ली गई। इतना ही नहीं वेयरहाउस के रजिस्टर में किट खरीदारी का कोई रिकॉर्ड भी जांच में नहीं मिला। यह भी बात सामने आई है कि जेम पोर्टल से खरीदे गए सामान पर न तो अधिकारियों के स्पष्ट हस्ताक्षर थे न ही पोर्टल पर कोटेशन या बाजार दर का उल्लेख किया गया था।
किट घोटाले में कार्रवाई के लिए शासन से जो चिट्ठी भेजी गई है, उसकी प्रतियां महालेखाकार इलाहाबाद, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, अपर निदेशक चिकित्सा-स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण गोरखपुर मंडल को भी प्रेषित की गई है। जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी से 10 गुना अधिक दर पर सिफलिस-रैपिड टेस्ट किट की खरीद की गई थी, जिसमें रिकवरी का आदेश हो चुका है।
ये तो स्वास्थ्य विभाग में घपले की वानगीभर है
किट घोटाला तो जनपद के स्वास्थ्य विभाग में हुए घपलों की वानगीभर है। सूत्रों की मानें तो अगर एनएचएम, आयुष्मान की फाइलें खंगाल ली जाएं तो घपले-घोटालों, अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त खड़ी हो जाएगी।
विभाग मामला दबाने में जुटा
सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग किट घोटाले को दबाने में जुटा हुआ है। यही कारण है कि इससे संबंधित फाइल अभी तक नहीं मिल सकी है। कर्मचारियों को आशंका सता रही है कि अगर फाइल मिल गई तो इस बड़े खेल में और भी नाम सामने आ सकते हैं।
वर्जन
इस संबंध में कोई चिट्ठी आने की जानकारी नहीं है। अगर सितंबर में चिट्ठी आई है तो पता करवाता हूं। अभी गायब फाइल नहीं मिली है। कर्मचारी ढूंढने में लगे हैं।
-डॉ. राजेश झा, सीएमओ